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‘अपने मंसूबों में सफल नहीं होगी सरकार’, विशेष संसद सत्र की संभावनाओं पर बोले विपक्षी नेता

Dinendra Das, a member of the Ram Mandir Trust, said, "There will be a meeting in Chhoti Chawani on September 2".

सितंबर महीने के मध्य में संसद के विशेष सत्र की संभावनाओं पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पप्पू यादव ने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष के रहते हुए सरकार अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होगी।

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने आईएएनएस से कहा, “सरकार परेशान है। इसे देश के भविष्य से मतलब नहीं है। महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है। यह महिलाओं को सबसे अधिक परेशान कर रही है। महिलाओं का सम्मान सरकार की संस्कृति में नहीं है। जेन-जी से किए वादों पर सरकार पीछे हट गई। किसानों के साथ भी यही व्यवहार हुआ था और एमएसपी लागू करने की आज तक कोई कोशिश नहीं हुई।”

पप्पू यादव ने आगे कहा कि परिसीमन और महिला बिल की बात उठ रही है। सरकार तीन साल पहले महिला बिल पास हो चुका है और राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए सरकार गंभीर ही नहीं है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के प्रति सरकार का कोई सम्मान नहीं है।

उन्होंने कहा, “सरकार कंगना रनौत जैसी महिलाओं के लिए विधेयक लाना चाहती है। गांव के किसान, मजबूत, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की बेटी-माताओं के लिए उनके बिल का कोई औचित्य नहीं है।”

परिसीमन के लिए सरकार कोविपक्ष के साथ बैठना चाहिए और संवाद करना चाहिए। यह सिर्फ सत्तापक्ष का देश नहीं है, बल्कि सभी का है। संवाद के बाद सरकार को परिसीमन बिल लाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सरकार ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर, जबरदस्त और पैसों की ताकत पर ‘साम-दाम-दंड-भेद’ अपनाकर बिल पास कराना चाहती है।”

पप्पू यादव ने कहा, “इस जन्म में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष के रहते हुए सरकार अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं होगी।”

झारखंड कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज राकेश सिन्हा ने कहा, “महिला आरक्षण बिल पार्लियामेंट से पास हो चुका है। तो अब वे कौन सा महिला आरक्षण बिल लाने वाले हैं? कांग्रेस पार्टी कह रही है कि आज से, इसी दिन से, इसी पल से सभी 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू करो। 543 सीटें हैं। इन पर 33 प्रतिशत आरक्षण दो। इसे आज से और अभी से लागू किया जाए।”

राकेश सिन्हा ने आगे कहा कि परिसीमन के माध्यम से सरकार तमाम बातों को उलझाना चाहती है। उन्होंने कहा, “परिसीमन से दक्षिण भारत के अलावा दूसरे राज्यों को भी नुकसान होगा।”

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा, “आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग एकजुट हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है कि आरक्षित सीटों की संख्या को कम किया जाए और उसकी पहचान मिटा दी जाए। पूरे भारत में भाजपा यही कर रही है। यह आदिवासियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझती है।”

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “हम जाति जनगणना के बिना परिसीमन बिल पास नहीं होने देंगे। महिला आरक्षण बिल पहले ही पास हो चुका है। अगर भारतीय जनता पार्टी सारी हदें पार करना चाहती है, लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है और तानाशाही लाना चाहती है, तो सड़कों से सदन और सदन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसका विरोध करेंगे।”

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