कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अंबाला में धान की कटाई की निगरानी करने और फसल के अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए दो ड्रोन तैनात किए हैं, जहां 35 गांवों को कृषि आग के प्रति संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है। विभाग के अनुसार, धान की खेती के अंतर्गत लगभग 22 लाख एकड़ भूमि मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर पंजीकृत है। कटाई का 45% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 25% फसल अवशेषों का प्रबंधन किया जा चुका है।
अंबाला के कृषि उप निदेशक (डीडीए) डॉ. वज़ीर सिंह ने बताया कि ड्रोन प्रतिदिन एक गांव की निगरानी करेंगे ताकि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं का पता लगाया जा सके। यह प्रणाली ऐसी घटनाओं को रिकॉर्ड और पहचान करेगी, सर्वेक्षण डेटा को सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाएगा और संबंधित खेतों या स्थानों का विवरण प्रतिदिन जिला प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा।
विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में जिले में सक्रिय आग लगने की घटनाओं (एएफएल) में धीरे-धीरे कमी दर्ज की है। पिछले वर्ष आठ एएफएल दर्ज किए गए, जिसके परिणामस्वरूप तीन एफआईआर दर्ज की गईं। उन्होंने कहा, “कृषि विभाग फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रहा है। इस वर्ष फसल अवशेषों को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के बजाय चारे के रूप में उपयोग करने के अलावा, इन सीटू और एक्स सीटू प्रबंधन के माध्यम से उनका प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, और सरकार द्वारा दी जा रही प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।”
इस बीच, असमय बारिश से धान किसान चिंतित हैं, क्योंकि गीले स्टॉक से अनाज मंडियों में कामकाज प्रभावित हो रहा है और कटाई में देरी होने का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग ने कहा कि अभी तक फसल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, हालांकि बारिश से कटाई में बाधा आने की संभावना है।
अनाज बाजारों में किसानों ने कहा कि भंडार को ढकने के प्रयासों के बावजूद हजारों बोरी धान पानी में भीग गई, जिससे नमी के स्तर में वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अंबाला छावनी अनाज मंडी में सचिव नीरज भारद्वाज ने कहा, “अनाज मंडियों में पहुंचे स्टॉक को समय पर ढक दिया गया ताकि असमय बारिश के कारण कोई नुकसान न हो। हालांकि, इससे आज अनाज उठाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।”
कृषि उप निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि कुरुक्षेत्र में धान की 60% से अधिक कटाई पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब तक बारिश से फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “किसानों को सलाह दी जाती है कि वे निचले इलाकों से पानी निकाल दें ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके। बेमौसम बारिश से कुछ दिनों तक फसल कटाई प्रभावित होगी।”


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