बिहार सरकार के मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में समान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों के लिए व्यापक सहायता नीति बनाने पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
संतोष सुमन ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की मूल भावना तभी पूरी होगी, जब सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित हो। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के पात्र विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क में छूट, नामांकन और शिक्षण शुल्क में सहायता की विभिन्न योजनाएं संचालित हैं। ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को भी कुछ योजनाओं तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों जैसे संस्थानों में पारिवारिक आय के आधार पर शिक्षण शुल्क में छूट मिलती है। हालांकि, इन सुविधाओं का दायरा अभी व्यापक और एकसमान नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट नहीं मिलती है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। संतोष सुमन ने कहा कि ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों के लिए ऐसी समग्र नीति बनाई जानी चाहिए, जिसके तहत संघ लोक सेवा आयोग, बिहार लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क में रियायत मिले। कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में नामांकन शुल्क और शिक्षण शुल्क में आय आधारित छूट तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रवृत्ति की व्यवस्था हो।
उन्होंने कहा कि छात्रावास, भोजनालय (मेस) और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्चों के लिए भी सहायता का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक अभाव किसी योग्य विद्यार्थी की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बने। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सभी राज्य सरकारों से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करना नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर देना है। आरक्षण का अपना संवैधानिक और सामाजिक उद्देश्य है जबकि आर्थिक सहायता का आधार जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति होनी चाहिए। सामाजिक न्याय तभी अधिक व्यापक और प्रभावी होगा, जब उसके साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित हो।


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