आज दूसरे दिन भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जीएमएडीए) के कार्यालय में तलाशी और जब्ती अभियान जारी रहने के साथ ही, प्राधिकरण के लिए भूमि एकत्र करने वाली कंपनी टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
प्रमुख जांच एजेंसी के सूत्रों ने द ट्रिब्यून को बताया है कि निजी रियल एस्टेट कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी में कथित अनियमितताएं पाई गई हैं, और कीर्ति साधु बास के स्वामित्व वाली उपर्युक्त कंपनी की भूमिका की जांच की जा रही है। यह परामर्श एजेंसी कई राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्राधिकरणों के कार्यों को संभालती है।
खबरों के मुताबिक, ईडी उन व्यक्तियों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है जिनकी जमीन हाल ही में जीएमएडीए द्वारा न्यू चंडीगढ़ और मोहाली में अधिग्रहित की गई थी।
खबरों के मुताबिक, जीएमएडीए कार्यालय में 100 से अधिक ईडी अधिकारी तलाशी अभियान चला रहे हैं। प्राधिकरण के कनिष्ठ अधिकारियों को कल रात करीब 10 बजे कार्यालय से जाने की अनुमति दे दी गई थी, जबकि आवास सचिव विकास गर्ग समेत वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यालय में ही डटे रहे।
सूत्रों के मुताबिक, तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स नामक एक अन्य कंपनी की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। यह कंपनी पहले से ही ईडी और सीबीआई दोनों की निगरानी में है और पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों एजेंसियों द्वारा कई बार छापेमारी का सामना कर चुकी है। यह कंपनी रेमिगेट बिल्डस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और एमबी इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को नियंत्रित करती है, जिन्होंने मोहाली में दो साइटें अधिग्रहित की थीं और उसके बाद जीएमएडीए से करोड़ों की वित्तीय राहत प्राप्त की थी।
मंगलवार को, सीआरपीएफ कर्मियों की सहायता से ईडी की टीमों ने जीएमएडीए कार्यालय पर छापा मारा और मुख्य अभियंता के कक्ष सहित भवन की कम से कम तीन मंजिलों को सील कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन और कार्यालय के कंप्यूटर भी जब्त कर लिए गए।
ईडी ने विकास गर्ग, जीएमएडीए के मुख्य प्रशासक संदीप ऋषि, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर रोहित जिंदल, एस्टेट ऑफिसर अमन गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक (वित्त) राकेश पोपली और मुख्य अभियंता अजय गर्ग सहित कई वरिष्ठ जीएमएडीए अधिकारियों से पूछताछ की। अधिकारियों से पहले संयुक्त रूप से पूछताछ की गई और बाद में उन्हें आगे की पूछताछ के लिए उनके संबंधित कार्यालयों में ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने उनके मोबाइल फोन से चैट रिकॉर्ड भी बरामद किए।
ईडी ने दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकुला और लुधियाना में 27 स्थानों पर तलाशी और सर्वेक्षण अभियान चलाया। एक अहम मुद्दा जिसकी जांच की जा रही है, वह है मोहाली में 1.3 एकड़ ज़मीन पर फ़ूड कोर्ट बना रही रेमिगेट कंपनी को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया की माफ़ी। यह माफ़ी 2025 में तत्कालीन मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में हुई जीएमएडीए की 34वीं बैठक में मंज़ूर की गई थी। तत्कालीन जीएमएडीए के मुख्य अभियंता ने कथित तौर पर कहा था कि निर्माण से इतर शुल्क के तौर पर लगभग 40 करोड़ रुपये की मांग उचित नहीं थी, क्योंकि ज़मीन पर पहले से ही कई तरह के भार मौजूद थे।

