जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित अमन अस्पताल को चिकित्सा लापरवाही के लिए फूलमन अंसारी को 12.08 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है, साथ ही शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।
अपने आदेश में, आयोग के अध्यक्ष पुष्पिंदर सिंह और सदस्य शिवानी भार्गव और मनजीत सिंह भिंडर ने पाया कि अंसारी की बेटी सभ्या खातून गर्भवती थी और 9 जुलाई, 2018 को उसकी प्रसव तिथि निर्धारित थी। अंसारी ने कहा कि वह उसे जांच के लिए अमन अस्पताल ले गए थे क्योंकि यह उनके घर के पास था और परिवार का मानना था कि वहां योग्य डॉक्टर कार्यरत हैं।
शिकायत के अनुसार, उनकी मुलाकात अस्पताल में राजिंदर कौर से हुई, जिन्होंने सभ्या की जांच की और उन्हें अल्ट्रासाउंड स्कैन के लिए गुरप्रीत नर्सिंग होम भेज दिया। स्कैन के बाद, कौर ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि गर्भावस्था सामान्य है और उन्हें सलाह दी कि प्रसव पीड़ा शुरू होने पर सभ्या को अस्पताल ले आएं। उन्होंने कथित तौर पर कोई पर्ची नहीं दी, बल्कि उन्हें अस्पताल का विजिटिंग कार्ड दिया और जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क करने को कहा।
अंसारी ने बताया कि 9 अगस्त, 2018 को सुबह करीब 3:30 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद वह अपनी बेटी को अमन अस्पताल ले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सभ्या की हालत गंभीर थी और कौर ने उनसे 10,000 रुपये जमा करने को कहा। जब वह पैसे का इंतजाम करने घर गए, तो उन्हें फोन आया कि उनकी बेटी की हालत बिगड़ गई है।
वापस लौटने पर अंसारी को कथित तौर पर बताया गया कि कौर के पति कुलदीप सिंह ने सब्या को खन्ना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था और उसे अपनी निजी कार से वहां ले गए थे। उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बाद में पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका ऑपरेशन हुआ और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। मां और बच्ची दोनों की हालत गंभीर थी।
सभ्या को अनिल अस्पताल, पटियाला में भर्ती कराया गया, जहां 11 अगस्त को उसकी मृत्यु हो गई। नवजात शिशु को बाद में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, दिल्ली ले जाया गया, जहां 16 अगस्त को उसकी भी मृत्यु हो गई। आयोग ने गौर किया कि मामले की जांच फतेहगढ़ साहिब के सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई थी। जांच के बाद, 12 अगस्त, 2018 को मंडी गोबिंदगढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई और अदालत में चालान पेश किया गया।
शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया और चिकित्सा लापरवाही के लिए मुआवजा दिया गया।

