वरिष्ठ नागरिकों के बीच वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने रविवार को राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत पालमपुर में सात दिवसीय आजीविका प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य बुजुर्ग प्रतिभागियों को व्यावहारिक कौशल और छोटे एवं कुटीर उद्योगों में संलग्न होने के अवसर प्रदान करना है, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और गरिमा में वृद्धि हो सके।
कार्यक्रम का उद्घाटन पालमपुर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त रमेश कुमार ने किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अनमोल धरोहर हैं, जिनका अनुभव और ज्ञान सामुदायिक विकास की रीढ़ हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की पहल न केवल बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और सामाजिक भागीदारी को भी बढ़ाती है। उन्होंने स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों से सक्रिय रूप से भाग लेने और प्रशिक्षण का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया।
सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों को विभिन्न घरेलू उत्पादों को तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिन्हें स्थायी आय सृजन गतिविधियों में विकसित किया जा सकता है। सत्रों में उनकी क्षमताओं और रुचियों के अनुरूप कौशल-आधारित कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे वे भविष्य में स्वरोजगार के अवसरों का पता लगा सकेंगे।
जिला विकास अधिकारी भानु प्रताप ने तेजी से बदलती दुनिया में आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वित्तीय स्वतंत्रता के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता भी उतनी ही आवश्यक हो गई है, जिससे प्रतिभागियों को प्रासंगिक बने रहने और जुड़े रहने के लिए नई तकनीकों और कौशलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
जिला कल्याण अधिकारी साहिल मंडला ने प्रतिभागियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि कार्यशाला अपने उद्देश्यों की पूर्ति करेगी। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने और इसके व्यापक प्रभाव और पहुंच को बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
इस पहल से क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों को एक सार्थक मंच मिलने की उम्मीद है, जिससे वे समाज में योगदान जारी रखते हुए अधिक स्वतंत्र, आत्मविश्वासपूर्ण और उत्पादक जीवन जी सकेंगे।


Leave feedback about this