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ईपीएस ने तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी फिर शुरू करने की मांग की, गरीबों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने पर दिया जोर

अन्नाद्रमुक महासचिव और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने रविवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को रियायती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए अम्मा फार्मेसी को फिर से शुरू करने की मांग की।

एक बयान में पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि दवाओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने में सरकार की नाकामी से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो जीवनरक्षक दवाओं पर निर्भर हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने वर्ष 2014 में सहकारी क्षेत्र के माध्यम से अम्मा फार्मेसी की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य लोगों को जरूरी दवाएं किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराना था।

पलानीस्वामी ने कहा कि फार्मास्युटिकल कंपनियों की ओर से दवाओं की अत्यधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतों के बाद यह पहल शुरू की गई थी। उनके नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक सरकार ने बाद में पूरे तमिलनाडु में अम्मा फार्मेसी का विस्तार किया, जिससे मरीजों को इलाज के खर्च में राहत मिली और दवाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में सत्ता में आई द्रमुक सरकार ने इस पहल को कमजोर किया, अम्मा फार्मेसी का संचालन बंद कर दिया और निजी भागीदारी के साथ ‘मुख्यमंत्री फार्मेसी’ के नाम से एक वैकल्पिक व्यवस्था को बढ़ावा दिया। पलानीस्वामी के मुताबिक, मौजूदा सरकार ने इन केंद्रों को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया है।

ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ जीवनरक्षक दवाओं की बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाए जाने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने 27 अक्टूबर को दवाओं की कीमतों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने अस्पतालों में बेची जाने वाली दवाओं की कीमतों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्टीकरण मांगा है।

पलानीस्वामी ने दवाओं की कीमतों को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती जा रही है, वहीं दूसरी ओर टीएएसएमएसी के माध्यम से बेची जाने वाली शराब पर कर बढ़ाकर सालाना 1,200 करोड़ से 1,600 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने राज्य सरकार से अम्मा फार्मेसी को पूरी तरह दोबारा संचालित करने और जरूरतमंद परिवारों तक सस्ती दवाएं पहुंचाने की मांग की। साथ ही सवाल किया कि क्या सरकार आम लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को प्राथमिकता देकर उनके आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कदम उठाएगी।

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