N1Live Entertainment सिनेमा में इतना योगदान देने के बाद भी रंगमंच में जाने से पहले की बेचैनी आज भी वैसी है : अनुपम खेर
Entertainment

सिनेमा में इतना योगदान देने के बाद भी रंगमंच में जाने से पहले की बेचैनी आज भी वैसी है : अनुपम खेर

Even after contributing so much to cinema, the restlessness I feel before stepping onto the stage remains exactly the same today: Anupam Kher.

अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अपनी नाटक ‘जाने पहचाने अंजाने’ के लिए अंतर्राष्ट्रीय टूर पर हैं। अभिनेता ने शो में जाने से पहले की बेचैनी के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि अभिनय की दुनिया में इतना योगदान देने के बाद भी रंगमंच में जाने से पहले उनके अंदर की बेकरारी आज भी वैसी की वैसी है अभिनेता अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें वे बैकस्टेज से गुजरते हुए स्टेज पर जा रहे हैं। अभिनेता ने अपनी इस पोस्ट के जरिए अपनी बेचैनी को बयां करते हुए लिखा, “स्टेज तक का वो अकेला सफर।”

अभिनेता अनुपम खेर ने बताया कि एक थिएटर आर्टिस्ट के लिए सबसे अकेला सफर स्टेज तक का छोटा सा रास्ता होता है। उन्होंने बैकस्टेज के दौरान चल रहे ख्यालों को शब्दों के जरिए पिरोते हुए लिखा, “उस छोटे से सफर में आप अपने ख्यालों, अपने शक, अपनी घबराहट और अपने दिल की धड़कन की आवाज के साथ बिल्कुल अकेले होते हैं। डर लगता है कि क्या होगा अगर मैं स्टेज पर भूल गया? क्या होगा अगर मैं दर्शकों से जुड़ नहीं पाया? क्या होगा अगर आज मेरी रात नहीं है? आप फोकस करने की कोशिश करते हो, एक गहरी सांस लेते हो और खुद को याद दिलाते हो कि इस पल को जीना है।”

अभिनेता ने बताया कि भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में काम करने और इतने कैमरों का सामना करने के बाद स्टेज में जाने से पहले की घबराहट आज भी उतनी ही बरकरार है। उन्होंने लिखा, “मैं 41 सालों से फिल्मों में हूं, अपनी 555वीं फिल्म पर काम शुरू किया है, हजारों बार कैमरे का सामना कर चुका हूं और दुनियाभर के दर्शकों के सामने परफॉर्म कर चुका हूं लेकिन फिर भी, थिएटर के स्टेज पर हर एंट्री से पहले, वो घबराहट आज भी होती है। वो छोटा सा डर आज भी मेरे साथ चलता है।”

अभिनेता अनुपम खेर ने शो से जाने से पहले की बेचैनी को आशीर्वाद बताया है। उनका मानना है कि कोई एक्टर जिस दिन नर्वस होना बंद कर देगा, शायद उसी दिन से वो अपने दर्शकों और अपनी कला को हल्के में लेना शुरू कर देगा। उन्होंने लिखा, “डर आपको विनम्र बनाए रखता है। यह आपको याद दिलाता है कि आपने चाहे कितने भी साल परफॉर्म किया हो, हर नया दर्शक एक नई शुरुआत है और फिर आप स्टेज पर कदम रखते हो। लाइट्स आप पर पड़ती हैं, दर्शक आपके साथ सांस लेते हैं और धीरे-धीरे डर फोकस में बदल जाता है, घबराहट एनर्जी में और अकेलापन एक साथ मिलकर खुशी मनाने में बदल जाता है। ये हमारे नाटक ‘जाने पहचान अंजाने’ के लिए डलास में बैकस्टेज से स्टेज तक का मेरा सफर था। कुछ अकेले कदम और उसके बाद थिएटर का जादुई साथ।”

Exit mobile version