विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर में वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया। राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और बदलते वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की, जिसमें बदलते शक्ति संतुलन, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं और समान सोच वाले पार्टनर्स के बीच करीबी रणनीतिक तालमेल की जरूरत शामिल है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं देकर बहुत खुशी हुई। समकालीन वैश्विक घटनाक्रमों पर उनके विचारों और हमारी रणनीतिक साझेदारी के लिए उनकी सकारात्मक भावनाओं की मैं बहुत सराहना करता हूं।”
गौरतलब है कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, सिविल न्यूक्लियर सहयोग, क्लीन एनर्जी और इंडो-पैसिफिक जैसे क्षेत्रों में एक लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों ने इस रिश्ते को लगातार बदलती दुनिया में एक स्थिरता प्रदान करने वाला कारक बताया है, जिसमें पेरिस और नई दिल्ली रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की वकालत करते रहे हैं।
पेरिस में, एस. जयशंकर ने फ्रांस के राजदूतों के सम्मेलन को भी संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को नया आकार देने वाले परिवर्तनों पर बात की। उन्होंने बताया कि व्यापार, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, संसाधन और कनेक्टिविटी आज की दुनिया में बदलावों को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि बदलावों का सामना करने में देशों की सोच में बदलाव एक निर्णायक फैक्टर बन गया है।
उन्होंने बहुध्रुवीयता और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने में भारत-फ्रांस साझेदारी को एक अहम स्तंभ बताया।
इससे पहले, बुधवार को एस. जयशंकर ने पेरिस में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ पहली भारत-वीमर फॉर्मेट मीटिंग में हिस्सा लिया। बैठक में भारत की पहली भागीदारी थी, जो प्रमुख यूरोपीय शक्तियों के साथ अहम संवाद के लिए एक नए रास्ते का संकेत देती है।
विदेश मंत्री ने कहा, “हम पिछले कुछ सालों से इंडो-पैसिफिक में हो रही उथल-पुथल को देख रहे हैं। यूरोप खुद भी मुश्किल हालात से गुजर रहा है, जिनमें से कई के रणनीतिक नतीजे हैं। लेकिन इसके अलावा, कुछ ऐसी बड़ी घटनाएं भी हुई हैं जो ग्लोबल ऑर्डर को ही फिर से परिभाषित कर सकती हैं। हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हों, लेकिन इसके बावजूद या शायद इसी वजह से, हमारे लिए नियमित तौर पर विचारों का आदान-प्रदान करना और आकलन शेयर करना बहुत फायदेमंद है।”
जयशंकर ने यह भी कहा, “फ्रांस हमारे सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक है। हमारी लगातार बातचीत उस रिश्ते को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

