बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने गुरुवार को कहा कि नेपाल के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर फटने के कारण आई प्रलयंकारी बाढ़ का बिहार पर फिलहाल कोई भयावह असर नहीं पड़ा है। गंडक नदी में जलस्राव नियंत्रण में है और वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
डिप्टी सीएम लोगों से अपील की कि वे सतर्क रहें, लेकिन किसी तरह की घबराहट न करें। विजय चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ और उसके संभावित प्रभाव को लेकर बिहार में गंडक नदी की स्थिति की समीक्षा की। सबसे पहले पूरे इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया गया और इसके बाद वाल्मीकिनगर पहुंचकर जल संसाधन विभाग तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की गई।
उन्होंने बताया कि नेपाल में जिस स्थान पर ग्लेशियर फटने की घटना हुई है, वह बिहार के वाल्मीकिनगर से करीब 250 से 300 किलोमीटर ऊपर है। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान बाढ़ के पानी का वेग और प्रवाह स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। इसके अलावा गंडक नदी में घटना के समय जलस्तर सामान्य से भी कुछ कम था। इन दोनों परिस्थितियों का बिहार को लाभ मिला और संभावित खतरे के बावजूद स्थिति भयावह नहीं बनी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल के देवघाट में जलस्तर की निगरानी के लिए गेज मीटर लगा है। नेपाल सरकार की ओर से वहां करीब सात से आठ मीटर पानी आने का अनुमान जताया गया था। आठ मीटर वहां खतरे का निशान है। हालांकि जलस्तर अधिकतम करीब सात मीटर तक ही पहुंचा और अब इसमें कमी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर अधिकतम दो से सवा दो लाख क्यूसेक जलस्राव आने का आकलन किया गया था। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन ने एहतियातन पूरी तैयारी कर रखी थी। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क किया गया और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह भी दी गई।
विजय चौधरी के अनुसार, गंडक बराज पर अब तक अधिकतम जलस्राव करीब एक लाख दस से बारह हजार क्यूसेक रहा है, जबकि फिलहाल यह करीब एक लाख चार हजार क्यूसेक है। सुबह जलस्राव एक लाख क्यूसेक से भी नीचे चला गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ऊपर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार भी फिलहाल चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है। उन्होंने बताया कि नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद पानी सबसे पहले भोटे कोसी नदी में आया। इसके बाद यह त्रिशूली नदी में पहुंचा, जो आगे चलकर नारायणी बनती है और भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के रूप में प्रवाहित होती है। इस लंबी दूरी के कारण पानी की तीव्रता और प्रवाह में कमी आई।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बारे में निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। बादल फटने या ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाएं अचानक हो सकती हैं। इसलिए मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन से लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग भी पूरी मुस्तैदी से स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर पहुंचने पर यह स्पष्ट हुआ कि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद हैं। स्थानीय लोगों में भी सरकार की तैयारियों को लेकर संतोष है। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए, पर घबराने की जरूरत नहीं है।


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