रविवार शाम को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास साराह और बांदी क्षेत्रों में जंगल में आग लगने की दो घटनाएं सामने आईं, जिससे इस क्षेत्र में जंगल में आग लगने की कुल घटनाओं की संख्या 80 हो गई है।
धर्मशाला के संभागीय वन अधिकारी अमित शर्मा ने सोमवार को बताया कि वन और अग्निशमन विभागों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने में करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
वन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर इस वर्ष अब तक जंगल में आग लगने की 78 घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को सारा और बांदी में हुई घटनाओं को जोड़ने के बाद कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
इन घटनाओं से लगभग 347 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार धर्मशाला वन विभाग को लगभग 92 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि अधिकतर मामलों में लोग अपने घास के मैदानों को साफ करने के लिए आग लगाते हैं और ये आग बाद में जंगलों में फैल जाती है, जिससे काफी नुकसान होता है।
शर्मा ने बताया कि मानसून के बाद ‘द्वितीय चरण की निगरानी’ के दौरान आग से हुए नुकसान का अंतिम आकलन किया जाता है। इस चरण में प्रभावित क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते हैं और कई पौधे प्राकृतिक रूप से फिर से उग आते हैं, जिससे वास्तविक नुकसान को दर्शाने वाले आंकड़ों में कमी आ सकती है।
जंगल की आग बुझाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र का ऊबड़-खाबड़ भूभाग, 60 से 70 प्रतिशत तक की ढलान, तेज हवाएं और पानी की कमी अग्निशमन अभियानों को और भी कठिन बना देती हैं।
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि आग बुझाने में लगे कर्मचारियों और ग्रामीणों की सुरक्षा वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके बावजूद, विभाग जंगल की आग पर जल्द से जल्द काबू पाने और वन संसाधनों को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। पीटीआई

