July 21, 2026
National

हार मानने के बजाय खोजा समाधान : राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी नेहा सोलंकी को सम्मानित

Found a solution instead of giving up: President Murmu to honour Neha Solanki.

जब एक स्कूल ने नेहा सोलंकी के बेटे को यह कहते हुए दाखिला देने से इनकार कर दिया कि वह बिना सहारे के बैठ नहीं सकता, तब नेहा ने हार मानने के बजाय समाधान खोजने का फैसला किया। मनोवैज्ञानिक और एक मां होने के नाते उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए एक विशेष अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम विकसित किया। इस नवाचार के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 31 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन की ओर से ‘ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन 2026’ पुरस्कार से सम्मानित करेंगी।

पाली जिले की निवासी नेहा सोलंकी ने अपनी निजी चुनौती का ऐसा समाधान विकसित किया, जिससे देशभर के हजारों दिव्यांग बच्चों को लाभ मिल सकता है। इस पहल की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई, जब उन्होंने अपने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे दुरंजय का स्कूल में दाखिला कराने का प्रयास किया।

नेहा के अनुसार, एक स्कूल के प्रधानाचार्य ने उनसे कहा कि उनके बेटे को दाखिला तभी दिया जा सकता है, जब वह बिना सहारे के बैठना सीख जाए। स्कूल में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए उपयुक्त बैठने की व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद नेहा ने केवल अपने बेटे ही नहीं, बल्कि ऐसे सभी बच्चों की समस्या का समाधान तलाशने का निर्णय लिया, जो आवश्यक सुविधाओं के अभाव में शिक्षा से वंचित हो रहे थे।

नेहा के अनुसार, उनका बेटा दुरंजय गर्भावस्था के 27वें सप्ताह में समय से पहले पैदा हुआ था। जन्म के समय उसका वजन लगभग 900 ग्राम था और बाद में उसमें सेरेब्रल पाल्सी का पता चला। बेटे की स्थिति का पता चलने के बाद नेहा को कई वर्षों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्कूलों ने आवश्यक सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए उनके बेटे को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने रिहैबिलिटेशन साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की।

पढ़ाई के दौरान नेहा ने महसूस किया कि समस्या बच्चों में नहीं, बल्कि स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाओं और सहायक उपकरणों की कमी है। इसके बाद उन्होंने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के सहयोग से तीन से 12 वर्ष आयु वर्ग के सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए एक स्वदेशी अडैप्टिव सीटिंग सिस्टम विकसित किया। इसे तैयार करने और इस पर अध्ययन करने में उन्हें करीब नौ महीने लगे।

विशेष रूप से डिजाइन किया गया यह सीटिंग सिस्टम बच्चों के शरीर को आवश्यक सहारा प्रदान करता है। इससे वे पढ़ाई, भोजन, लेखन और कक्षा की अन्य गतिविधियों के दौरान अधिक सुरक्षित और आरामदायक तरीके से बैठ पाते हैं। साथ ही बार-बार सहारे की जरूरत कम होती है और गिरने का जोखिम भी घटता है।

नेहा के अनुसार, इस नवाचार से उनके बेटे दुरंजय की दैनिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वह पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर होकर सीखने तथा अपने रोजमर्रा के कार्य करने में सक्षम हुआ है।

इस नवाचार के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने नेहा सोलंकी को ‘ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन 2026’ के लिए चयनित देशभर के 26 नवोन्मेषकों में शामिल किया है। उन्हें 31 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी।

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