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सरकार शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही: सिद्धारमैया

Government actively working to bridge the gap between education and employment: Siddaramaiah

15 मई । कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व का जरिया बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, उन्होंने शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया।

बेंगलुरु के ‘द ललित अशोक’ में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित ‘कैंपस टू करियर (सी टू सी) समिट: फ्यूचर-रेडी यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेज’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक का भारत की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभरना, शिक्षा और मानव पूंजी में दशकों के निवेश का नतीजा है।

इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर, उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे, चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास मंत्री शरणप्रकाश पाटिल, कृषि मंत्री एन. चेलुवरैयास्वामी, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और छात्र मौजूद थे।

शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली जरिया माना था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार भी मानती है कि शिक्षा, ज्ञान, कौशल विकास, नवाचार और समावेशी विकास के अवसर पैदा करके एक समतावादी, प्रगतिशील और सशक्त समाज बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक का मौजूदा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 30.7 लाख करोड़ रुपये है और बेंगलुरु में 875 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं। उन्होंने कहा कि प्रति लाख आबादी पर 66 कॉलेजों के साथ कर्नाटक देश में सबसे आगे है। यह उच्च शिक्षा तंत्र की मजबूती और पहुंच को दिखाता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ शिक्षा तक पहुंच होना ही काफी नहीं है।

सिद्धारमैया ने कहा कि हमारा ध्यान अब दाखिले को सार्थक नतीजों में बदलने पर है। हालांकि यह पक्का करते हुए कि उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाला हर छात्र रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के लिए तैयार हो।

उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न पहलों के जरिए शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। ‘युवा निधि’ योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ग्रेजुएट छात्रों को शिक्षा से रोजगार की ओर बढ़ने के दौरान मदद करने के लिए वित्तीय सहायता और आधुनिक कौशल प्रशिक्षण देता है।

मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीति का भी जिक्र किया। जिसका उद्देश्य 20 लाख नौकरियां पैदा करना है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के पास प्रस्तावित 40,000 करोड़ रुपये का क्विन सिटी प्रोजेक्ट ज्ञान, स्वास्थ्य, नवाचार और रोजगार के अवसरों पर केंद्रित एक भविष्य-तैयार अर्थव्यवस्था की नींव रखेगा।

विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि पाठ्यक्रम में बाजार की वास्तविकताओं की झलक होनी चाहिए और संस्थानों को छात्रों को व्यावहारिक चुनौतियों के लिए तैयार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपनी सफलता को केवल दाखिलों की संख्या से ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए वे जो परिणाम उत्पन्न करते हैं, उनके आधार पर भी मापना चाहिए।

‘कैंपस टू करियर समिट’ को एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि यह नीति निर्माताओं, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत के नेताओं और कौशल विकास संगठनों को एक साथ लाकर, शैक्षणिक शिक्षा और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगा।

उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग की भी सराहना की। जिसने पाठ्यक्रमों, उद्योग की बदलती मांगों और वैश्विक शैक्षिक रुझानों के अनुरूप अभिनव कार्यक्रम शुरू किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि विभाग ने छात्रों को इंटर्नशिप के अवसर, उद्योग का अनुभव और कौशल विकास सहायता देने के लिए विप्रो, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और इंफोसिस जैसे अग्रणी संगठनों के साथ साझेदारी की है।

सिद्धारमैया ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा, साथ ही ग्रामीण और शहरी, दोनों तरह के छात्रों के लिए समावेशी अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि हम सभी एक ही लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं, एक ऐसा कर्नाटक, जहां हर स्नातक अपने करियर के लिए तैयार हो और हर संस्थान भविष्य के लिए निर्मित हो।

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