उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को रुपए को समर्थन देने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) तथा वित्त मंत्रालय द्वारा हाल में उठाए गए कदमों का समर्थन किया। संगठन ने कहा कि नीति निर्माता दीर्घकालिक और स्थायी विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रुपए में हालिया उतार-चढ़ाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार और आरबीआई द्वारा किए जा रहे समन्वित प्रयास सराहनीय हैं।
उनकी यह टिप्पणी पूर्व आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव के उस हालिया बयान के संदर्भ में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रुपए की दीर्घकालिक मजबूती अंततः भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। मिंडा ने कहा, “हम मजबूत आर्थिक आधार पर टिके दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह के संबंध में डॉ. सुब्बाराव के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं और सरकार व आरबीआई द्वारा पहले से उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं।”
एसोचैम ने कहा कि इन उपायों की बदौलत रुपया हाल के निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा है। संगठन ने 31 अगस्त को समाप्त हुई 133 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) मोबिलाइजेशन विंडो की सफलता का भी उल्लेख किया।
वहीं, एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई द्वारा अनुमानित 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए अपनाई गई संतुलित मौद्रिक नीति को इसके प्रमुख कारण बताया।
उद्योग संगठन ने दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा हाल में घोषित कदमों का भी स्वागत किया। इनमें आयकर संशोधन अध्यादेश, 2026 भी शामिल है, जिसके तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश पर ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट प्रदान की गई है।
इसके अलावा, एसोचैम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारियों के दौरान लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) पर निवेशकों की राय पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, उद्योग संगठन ने कर ढांचे को और तर्कसंगत बनाने, कर प्रावधानों की व्याख्या को सरल करने तथा अल्पकालिक पूंजी प्रवाह की तुलना में दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपायों पर विचार करने की आवश्यकता भी जताई। एसोचैम ने कहा कि वह भारत को दीर्घकालिक वैश्विक पूंजी के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने के उद्देश्य से सरकार, आरबीआई और बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

