February 5, 2026
General News National

पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों और विपक्षी पार्टियों ने पेंडिंग डीए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

Government employees and opposition parties in West Bengal welcomed the Supreme Court’s decision on pending DA.

5 फरवरी । पश्चिम बंगाल में लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच और विभिन्न राजनीतिक दलों ने स्वागत किया।

राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लगातार आंदोलन का नतीजा है।

उन्होंने कहा, “यह उन सभी राज्य सरकारी कर्मचारियों की जीत है, जिन्हें लंबे समय से उनका वैध हक यानी महंगाई भत्ता नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल सरकार को बकाया डीए का भुगतान करना होगा। यह हमारे 1,100 दिनों से ज्यादा चले आंदोलन का परिणाम है।”

भास्कर घोष ने आंदोलन में साथ देने वाले सभी वकीलों, संगठनों, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और वरिष्ठ वकील विकास भट्टाचार्य का आभार जताया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को बिना किसी देरी के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए और कर्मचारियों को उनका डीए जारी करना चाहिए।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को आदेश दिया कि वह 31 मार्च तक राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बकाया डीए का 25 प्रतिशत भुगतान करे। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इसके साथ ही चार सदस्यीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया, जो शेष 75 प्रतिशत डीए के भुगतान पर फैसला लेगी।

इसी पीठ ने पिछले साल अगस्त में इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था।

इससे पहले 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर 25 प्रतिशत डीए देने का निर्देश दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए अदालत से छह महीने की मोहलत मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में राज्य के सरकारी कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित किया है। आज ममता बनर्जी गलत साबित हुई हैं, जो बार-बार कहती थीं कि डीए कर्मचारियों का अधिकार नहीं है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि डीए कोई अनुदान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैध अधिकार है।”

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वर्षों के संघर्ष और लंबे इंतजार के बाद अब राज्य सरकार के कर्मचारी अदालत के आदेश के अनुसार अपना हक पाने जा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

उन्होंने कहा, “लंबे संघर्ष और अडिग संकल्प के बाद राज्य सरकार के कर्मचारी अब अपने कानूनी अधिकार के तहत डीए पाने की स्थिति में हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि कर्मचारियों की एकता, धैर्य और दृढ़ता का प्रमाण है।”

वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता और वकील विकास भट्टाचार्य ने भी फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा, “अगर सरकार में जरा भी शर्म है, तो उसे बिना समय गंवाए बकाया डीए जारी कर देना चाहिए। इस मामले को लड़ने और टालने में सरकार ने बेवजह समय और पैसा बर्बाद किया है।”

कांग्रेस की ओर से आशुतोष चटर्जी ने कहा कि पार्टी हमेशा राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ खड़ी रही है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ममता बनर्जी सरकार के लिए एक सबक है। उन्हें अपनी गलती सुधारनी चाहिए।

हालांकि, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले को राज्य सरकार की आंशिक जीत बताया। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 100 प्रतिशत डीए देने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि सिर्फ 25 प्रतिशत का निर्देश दिया है। इससे साफ है कि अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए फैसला लिया है।”

2022 से अब तक इस मामले में 18 बार सुनवाई टली, क्योंकि ममता बनर्जी सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा अवमानना कार्यवाही शुरू किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

पिछले साल के राज्य बजट में 1 अप्रैल 2025 से बंगाल सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए को मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और राज्य कर्मचारियों के डीए के बीच करीब 40 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।

Leave feedback about this

  • Service