हरियाणा सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी दावों पर अंकुश लगाने के लिए अनिवार्य तृतीय-पक्ष ऑडिट का आदेश दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) सुमिता मिश्रा ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश जारी किया।
मिश्रा ने कहा कि दावों की प्रक्रिया के सभी चरणों में सख्त ऑडिट तंत्र लागू किए जाएंगे, और हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को तृतीय पक्ष प्रशासक के कार्यों की देखरेख का जिम्मा सौंपा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों से दावों को बढ़ाने के लिए एक रणनीति तैयार करने का भी निर्देश दिया, जिससे योजना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मरीजों के कल्याण पर जोर देते हुए मिश्रा ने कहा कि क्रॉनिक हीमोडायलिसिस को इस योजना के तहत सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि नियमित उपचार की आवश्यकता वाले गुर्दे के मरीजों को बिना किसी कठिनाई के पूर्ण वित्तीय सहायता मिल सके।
समीक्षा में पाया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और राज्य की चिरायु योजना के तहत लगभग 28 लाख दावों का निपटारा किया है और अब तक 3,900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में ही दावों की राशि 1,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो जागरूकता और योजनाओं के उपयोग में वृद्धि को दर्शाता है।

