N1Live National सरकार ने ओएनजीसी की गैस की कथित हेराफेरी के आरोप में रिलायंस और बीपी से मांगे 2.81 अरब डॉलर: मंत्री
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सरकार ने ओएनजीसी की गैस की कथित हेराफेरी के आरोप में रिलायंस और बीपी से मांगे 2.81 अरब डॉलर: मंत्री

Government seeks $2.81 billion from Reliance and BP for alleged misappropriation of ONGC gas: Minister

16 मार्च । सरकार ने भारत के पूर्वी तटवर्ती केजी बेसिन में स्थित ओएनजीसी के तेल क्षेत्र से कथित तौर पर गैस की हेराफेरी करने के आरोप में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और ब्रिटेन की तेल कंपनी बीपी से 2.81 अरब डॉलर की राशि का दावा किया है। यह जानकारी सोमवार को संसद में दी गई।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और बीपी से 2.81 अरब डॉलर की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल भारत के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

मंत्री का यह जवाब राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में आया। सांसद ने पूछा था कि क्या यह सही है कि सरकार ने ओएनजीसी के पूर्वी तट के गैस ब्लॉक्स से कथित गैस चोरी या निकासी के मामले में निजी कंपनियों से 2 अरब डॉलर से ज्यादा की मांग की है।

सांसद ने यह भी पूछा था कि इस मामले में शामिल निजी कंपनियों के नाम और अब तक उनसे प्राप्त भुगतान की स्थिति क्या है।

जानकारी के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझेदार कंपनी बीपी से लगभग 2.81 अरब डॉलर (करीब 25,983 करोड़ रुपए) की मांग की है। यह मांग फरवरी 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद की गई, जिसमें 2018 के उस आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द कर दिया गया था जिसने पहले रिलायंस को इस मामले में जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का आरोप है कि 2004 से 2013-14 के बीच रिलायंस के केजी-डी6 ब्लॉक से पास के ओएनजीसी ब्लॉक्स की गैस निकल गई, जिससे कंपनी को 1.55 अरब डॉलर से अधिक का अनुचित लाभ हुआ, जिस पर ब्याज भी जोड़ा गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 14 फरवरी 2025 को सरकार के पक्ष में फैसला दिया था, और पहले दिए गए उस सिंगल जज के फैसले को पलट दिया था जिसमें रिलायंस के पक्ष में निर्णय दिया गया था और सरकार की मांग को ‘अनसस्टेनेबल’ बताया गया था।

हालांकि रिलायंस का कहना है कि यह गैस ‘माइग्रेटरी’ थी, यानी प्राकृतिक रूप से एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में चली गई थी, इसलिए कंपनी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां इस मामले की सुनवाई जारी है।

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