April 4, 2025
National

झारखंड में प्राइवेट स्कूलों की ‘मनमानी’ पर सरकार सख्त, पूर्वी सिंहभूम में 78 स्कूलों को नोटिस

Government strict on the ‘arbitrariness’ of private schools in Jharkhand, notice to 78 schools in East Singhbhum

झारखंड सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। स्कूली शिक्षा विभाग के मंत्री रामदास सोरेन ने फीस वृद्धि, रि-एडमिशन के नाम पर रकम वसूली, स्कूल की ओर से निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने की शर्तें लगाने जैसी शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की गाइडलाइन का अनुपालन नहीं करने वाले स्कूलों पर 50 हजार से लेकर 2.50 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा। मंत्री के निर्देश पर उनके गृह जिले पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में शिक्षा विभाग ने 78 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों में सरकार की गाइडलाइन के उल्लंघन की शिकायतें मिली हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक की ओर से नोटिस में इन स्कूलों के मैनेजमेंट को 3 अप्रैल तक जवाब देने का कहा गया है।

स्कूलों को जारी नोटिस में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्कूल भवन, संरचना या परिसर का उपयोग केवल शिक्षा के उद्देश्य के लिए किया जाएगा और स्कूल परिसर में शिविर लगाकर किताब या अन्य सामग्री (यूनिफॉर्म-जूते) की खरीद के लिए अभिभावक या छात्र-छात्राओं को बाध्य-प्रेरित नहीं करने से संबंधित निर्देश हैं। इसके बावजूद स्कूल परिसर का उपयोग किताब बेचने के लिए किया जा रहा है।

कई स्कूलों में तय गाइडलाइन का उल्लंघन कर नए सत्र से फीस वृद्धि की शिकायतें भी मिली हैं। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों के मैनेजमेंट को पिछले तीन साल में फीस स्ट्रक्चर और उसमें वृद्धि का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है।

विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि विद्यालय स्तरीय फीस निर्धारण समिति का कार्यकाल तीन वर्षों के लिए होता है, लेकिन कुछ स्कूल इस निर्देश का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने बताया कि सभी जिलों के आयुक्तों और उपायुक्तों को पत्र लिखकर निर्देश दिया गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के आलोक में शुल्क समितियों का गठन सुनिश्चित कराएं। विद्यालय स्तर पर शुल्क निर्धारण के लिए गठित कमेटी में प्राचार्य, सचिव, विद्यालय प्रबंधन की ओर से मनोनीत तीन शिक्षक और शिक्षक संघ की ओर से नामित चार बच्चों के अभिभावक होंगे। विद्यालय प्रबंधन को फीस निर्धारण के एजेंडा और बैठक की जानकारी एक सप्ताह पहले देनी होगी।

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