संगीत जगत के ऑस्कर के नाम से मशहूर ग्रैमी अवॉर्ड्स के 68वें सीजन का आयोजन लॉस एंजिल्स में चल रहा है। इस बार कई भारतीय कलाकारों ने अपनी मजबूत दावेदारी दिखाई। हालांकि, वे पुरस्कार पाने में असफल रहे।
इस बार ग्रैमी में कोई भी भारतीय कलाकार जीत नहीं सका। हालांकि, भारत का ग्रैमी इतिहास गौरवशाली रहा है। पंडित रवि शंकर से लेकर उस्ताद जाकिर हुसैन तक कई महान कलाकारों ने यह सम्मान अपने नाम कर भारत का परचम लहराया है। फिर भी, साल 2026 में भारतीय दावेदारों को जीत नहीं मिली, जबकि नामांकन सूची में तीन भारतीय नाम शामिल थे।
पंडित रवि शंकर की बेटी और सितार वादक अनुष्का शंकर को ग्रैमी में दो नामांकन मिले थे। उनको सहयोगी ईपी चैप्टर आईआईआई वी रिटर्न टू लाइट को आलम खान और सरथी कोरवार के साथ बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम में और ट्रैक डेब्रेक को बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस में नॉमिनेशन मिला था। अनुष्का ने 13वीं बार नामांकन पाकर इतिहास रचा, लेकिन दोनों श्रेणियों में वे जीत से चूक गईं।
वहीं, ग्रैमी नॉमिनेशन में इंडो-अमेरिकी जैज पियानिस्ट चारू सूरी का नाम भी शामिल रहा। उन्होंने पहली बार नामांकन हासिल किया। उनका एल्बम श्यान बेस्ट कंटेम्परेरी इंस्ट्रुमेंटल एल्बम में शामिल था। इसके साथ ही फ्यूजन बैंड शक्ति (शंकर महादेवन, जॉन मैकलॉघलिन, गणेश राजगोपालन और वी. सेल्वागणेश के बैंड) को दो नामांकन मिले। उनका लाइव एल्बम माइंड एक्सप्लोसन बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम में और ट्रैक शेरनी ड्रीम बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस में था। शक्ति ने पहले भी ग्रैमी जीते हैं, लेकिन इस बार सफलता नहीं मिली।
सिद्धांत भाटिया का एल्बम साउंड ऑफ महाकुंभ भी बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम में नामांकित था, जो उनकी पहली नामांकन थी।
भारत इस बार पुरस्कार से चूक गया, लेकिन इन कलाकारों की वैश्विक पहचान भारतीय संगीत की बढ़ती ताकत और क्लासिकल, फ्यूजन और कंटेम्परेरी शैलियों में भारत का योगदान जारी है।

