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हैरिस जयराज: 6 साल की उम्र से सीखा कर्नाटक संगीत, कमाल की धुनों से बने सिनेमा के स्टार कंपोजर

Harris Jayaraj: Learned Carnatic music from the age of 6, became a star composer of cinema with his amazing tunes

हैरिस जयराज म्यूजिक इंडस्ट्री में कोई नया नाम नहीं हैं। उनके गाने साउथ के साथ ही बॉलीवुड के दर्शकों की प्लेलिस्ट पर छाए रहते हैं। ‘ऑरेंज’, ‘रंगम’ हो या ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी फिल्मों के हिट गानों ने उन्हें खूब लोकप्रिय बनाया। अपनी कमाल की धुनों से वह सिनेमा के स्टार कंपोजर के रूप में जाने जाते हैं।

8 जनवरी 1975 को चेन्नई में जन्मे मशहूर संगीतकार हैरिस जयराज मुख्य रूप से तमिल फिल्मों के लिए संगीत देते हैं, लेकिन तेलुगू, तमिल और हिंदी फिल्मों में भी उनका शानदार योगदान रहा है। उनकी धुनें इतनी लोकप्रिय हैं कि युवा पीढ़ी उनके संगीत को खास तौर पर पसंद करती है।

म्यूजिक फैमिली से संबंध रखने वाले हैरिस की संगीत यात्रा बहुत छोटी उम्र यानी 6 साल की उम्र से शुरू हुई थी। महज छह साल की उम्र में उन्होंने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू कर दिया। उनके पिता एसएम जयकुमार खुद एक मशहूर फिल्म गिटारिस्ट थे, जिन्होंने कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। हैरिस ने कीबोर्ड बजाना सीखा और ए.आर. रहमान जैसे दिग्गजों के साथ प्रोग्रामर के तौर पर काम किया। विज्ञापनों के लिए भी उन्होंने कई जिंगल्स बनाए।

संगीत निर्देशक के रूप में हैरिस का डेब्यू साल 2001 में तमिल फिल्म मिन्नाले से हुआ। इस फिल्म के गाने सुपरहिट रहे, खासकर ‘वसेगारा’ गाना बहुत लोकप्रिय हुआ। इस एल्बम ने उन्हें पहला फिल्मफेयर अवार्ड दिलाया। उसी साल मिन्नाले का हिंदी रीमेक रहना है तेरे दिल में रिलीज हुआ, जिसमें हैरिस ने कुछ नए गाने कंपोज किए। ‘जरा जरा बहकता है’ और ‘दिल को तुमसे प्यार हुआ’ जैसे गाने आज भी रोमांटिक प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। इस फिल्म ने हैरिस को बॉलीवुड में भी पहचान दिलाई।

इसके बाद हैरिस ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में संगीत दिया। साल 2003 में आई फिल्म काक्का काक्का के गाने ‘उयिरिन उयिरे’ ने उन्हें कई अवार्ड दिलाए। गजिनी के ‘सुट्टुम चरेडे’ गाने, अन्नियन के वारनम आयिरम में ‘नेन्जुक्कुल पेइधिदुम’, और येन्नई अरिंदाल जैसी फिल्मों के साउंडट्रैक ने उन्हें सुपरस्टार कंपोजर बना दिया।

उन्होंने सिनेमा को कई यादगार धुनें दीं। हालांकि, वह अपनी धुनों को सुनना पसंद नहीं करते। एक इंटरव्यू में हैरिस ने बताया कि वह अपनी पुरानी रचनाएं सुनना पसंद नहीं करते। उनका कहना है, “जीवन में आगे बढ़ना चाहिए, पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। जैसे पुरानी प्रेमिकाओं को नहीं देखते, वैसे ही पुराने एल्बमों को छोड़ आगे बढ़ो।”

हैरिस की खासियत मेलोडी, वेस्टर्न और इंडियन फ्यूजन है, जो काफी पसंद किए जाते हैं। हैरिस को कई सम्मान मिले हैं। तमिलनाडु सरकार से कलाईमणि अवार्ड और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिले हैं। उन्होंने 6 फिल्मफेयर अवार्ड साउथ जीते और 20 नामांकन मिले। इसके अलावा 4 तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवार्ड और इंटरनेशनल तमिल फिल्म अवार्ड भी उनके नाम हैं।

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