9 मई । बिहार में मई की भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। राजधानी पटना समेत कई जिलों में तेज तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई, जिसने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस पूरे मामले पर बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा ने दुख जताया है। उन्होंन कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी। साथ ही प्रदेश के बिल्डरों के काम की मॉनिटरिंग के लिए एक एजेंसी बनाने की भी बात कही।
मंत्री रत्नेश सदा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “ऐसा लगा जैसे प्रकृति ने अपना आपा खो दिया हो। जिस तरह शुक्रवार को 135 किलोमीटर की रफ्तार से तूफान आया, उसने भारी नुकसान पहुंचाया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई।”
मंत्री ने बताया कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही जिन इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
रत्नेश सदा ने यह भी कहा कि बिहार कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहता है। इनमें बाढ़, भूकंप, आगजनी, सूखा और दुर्घटनाएं जैसी स्थितियां शामिल हैं। ऐसे में सरकार अब आपदा से बचाव को लेकर और ज्यादा गंभीर कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने खास तौर पर बिल्डरों और निर्माण कार्य करने वालों से अपील की कि वे मानकों के अनुसार ही भवन निर्माण करें। सरकार इसके लिए एक अलग एजेंसी बनाने की योजना पर भी काम कर रही है, जो यह जांच करेगी कि भवन तय मानकों के मुताबिक बन रहे हैं या नहीं। अगर कोई नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार अब जिला स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाएगी, ताकि लोग भूकंपरोधी और सुरक्षित मकान बनाने के प्रति जागरूक हो सकें। उनका कहना है कि अगर भवन मजबूत और मानकों के अनुसार होंगे तो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जान-माल का नुकसान कम किया जा सकेगा।
बिहार में पिछले करीब 10 दिनों से तेज आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। इस दौरान कई जगह पेड़ गिर गए और बिजली गिरने की घटनाएं भी हुईं। इन हादसों में राज्यभर में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।


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