9 मार्च । मध्य प्रदेश के विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया। कोर्ट ने उपचुनाव को शून्य घोषित करते हुए पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत को विजयी बताकर विधायक घोषित कर दिया है।
इस फैसले से विजयपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है और कांग्रेस के मौजूदा विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी छिन गई है। कोर्ट ने कहा कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र और चुनावी शपथ पत्र में गलत व अधूरी जानकारी दी थी, जो चुनाव आयोग के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
करीब 11 महीने पहले रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी। उन्होंने उपचुनाव को रद्द करने की मांग की थी। रावत का आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने अपराधिक रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाईं। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतिम बहस पूरी की और फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनवाई पूरी होने पर कोर्ट ने रावत के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि नामांकन में गड़बड़ी के कारण चुनाव वैध नहीं था।
उपचुनाव में मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को हराकर विधायक का पद हासिल किया था। रावत उस समय राज्य के वन मंत्री थे। लेकिन, अब कोर्ट के फैसले से रावत को विधायक का दर्जा मिल गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश को 15 दिनों के लिए स्थगित रखा है। इस दौरान मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का मौका दिया गया है। 15 दिन बाद ही कोर्ट का आदेश प्रभावी होगा।
इस फैसले से विजयपुर क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस खेमे में निराशा है, जबकि भाजपा समर्थक उत्साहित हैं। रामनिवास रावत ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि न्याय की जीत हुई है। वहीं, मुकेश मल्होत्रा ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और न्याय की उम्मीद रखते हैं।

