April 1, 2026
Himachal

हिमाचल में टोल दरों पर सरकार का यू-टर्न, वाहनों के लिए नई दरें निर्धारित

Himachal Pradesh government takes U-turn on toll rates, fixes new rates for vehicles

हिमाचल प्रदेश में टोल और एंट्री टैक्स को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दरों में अहम संशोधन करते हुए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। मार्च में जारी अधिसूचना के तहत विभिन्न श्रेणियों में बढ़ाई गई टोल दरों पर विधानसभा के भीतर विपक्ष के तीखे विरोध और बाहर ट्रांसपोर्टर्स और आम लोगों की नाराजगी के बाद अब सरकार ने नीति में बदलाव किया है।

सबसे बड़ा फैसला यात्री वाहनों को लेकर लिया गया है। पहले 12+1 क्षमता तक के वाहनों के लिए 130 प्रतिदिन टोल निर्धारित किया गया था, जिसे अब घटाकर 100 प्रतिदिन कर दिया गया है। यह संशोधित दर हिमाचल के बाहर पंजीकृत 12 सीटर तक के वाहनों पर भी लागू होगी, जिससे बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों और टैक्सी ऑपरेटरों को भी राहत मिलेगी।

दरअसल, सरकार की शुरुआती अधिसूचना में अलग-अलग श्रेणियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक शुल्क तय किया गया था। इसमें 7,500 किलोग्राम तक के मालवाहक वाहनों के लिए 170, कुछ हल्के व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के लिए 320, दो एक्सल ट्रकों के लिए 570, तीन एक्सल वाहनों के लिए 600, 4 से 6 एक्सल वाले भारी वाहनों और निर्माण मशीनरी के लिए 800, जबकि 7 या उससे अधिक एक्सल वाले ओवरसाइज्ड वाहनों के लिए 900 प्रतिदिन टोल निर्धारित किया गया था।

इसके अलावा, ट्रैक्टरों के लिए 100 प्रतिदिन की दर तय की गई थी, जिसमें तिमाही और वार्षिक भुगतान का विकल्प भी दिया गया था। वहीं, मोटर और स्कूटर रिक्शा के लिए 30 प्रतिदिन शुल्क रखा गया था।

संशोधित टोल नीति में सरकार ने छूट के दायरे को भी व्यापक किया है। अब हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत हल्के मोटर वाहन, चाहे वे निजी हों या व्यावसायिक, दोनों को टोल से छूट मिलेगी। इसमें टैक्सी ऑपरेटरों को भी शामिल किया गया है, जो पहले इस दायरे में स्पष्ट रूप से नहीं आते थे। स्थानीय निवासियों के लिए भी सरकार ने राहत का प्रावधान किया है। टोल बैरियर के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अब सत्यापन के बाद मुफ्त कंसेशनल टोकन दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में टोल नहीं देना पड़ेगा।

टोल दरों में यह बदलाव उस समय आया है जब विपक्ष, खासकर भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए सरकार पर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया था। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दरों की समीक्षा का आश्वासन दिया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, संशोधित टोल ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि राज्य के राजस्व हितों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही, आम जनता और परिवहन क्षेत्र को भी राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य में पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।

सरकार ने यह साफ किया है कि संशोधित टोल दरें और नई छूटें वित्त वर्ष 2026–27 से राज्य के सभी अधिसूचित टोल बैरियरों पर लागू होंगी।

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