हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा रिपोर्टों और सर्वेक्षणों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी 2024-25 के प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में हिमाचल प्रदेश सात पायदान ऊपर चढ़कर समग्र रूप से छठे स्थान (केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों में) और राज्यों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
हिमाचल प्रदेश को 2023-24 में पीजीआई में 13 वां स्थान और 2022-23 में 21 वां स्थान प्राप्त हुआ था । शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने पीजीआई के प्रदर्शन को सरकार और राज्य के शिक्षा विभाग की एक और बड़ी उपलब्धि बताया है।
उन्होंने कहा, “पिछले तीन वर्षों में, राज्य ने सभी राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में अपनी स्थिति में सुधार किया है। एएसईआर रिपोर्ट में हमारे सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पिछले साल राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में हम 21 वें स्थान से पाँचवें स्थान पर पहुँच गए, और अब हमने पीजीआई रैंकिंग में भी बड़ा सुधार देखा है।”
पीजीआई 2.0 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की शिक्षा प्रणाली का मूल्यांकन दो श्रेणियों – परिणाम और शासन एवं प्रबंधन – के आधार पर करता है। इन दोनों श्रेणियों को आगे छह क्षेत्रों में विभाजित किया गया है – अधिगम परिणाम और गुणवत्ता, पहुंच, अवसंरचना एवं सुविधाएं, समानता, शासन प्रक्रियाएं और शिक्षकों की शिक्षा एवं प्रशिक्षण।
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को 1,000 में से 659.2 अंकों के साथ दूसरी सबसे उच्च श्रेणी, “प्राचेष्टा 2” में रखा गया है, जो पिछले वर्ष की रिपोर्ट की तुलना में 85.4 अंकों का सुधार दर्शाता है। विभिन्न क्षेत्रों में, राज्य ने समावेशी और समान शिक्षा से संबंधित ‘समानता’ क्षेत्र में 90.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। राज्य ने ‘पहुँच’ और ‘शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण’ क्षेत्रों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिनमें क्रमशः 86.6 प्रतिशत और 80.3 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं।
‘सीखने के परिणाम और गुणवत्ता’ के क्षेत्र में, जो शायद सबसे महत्वपूर्ण है, राज्य ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। 2023-24 में 52.4 अंकों से बढ़कर नवीनतम रिपोर्ट में 117.19 अंक हो गए हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में कुल भार 240 अंक होने के कारण अभी और सुधार की गुंजाइश है।
राज्य को ‘शासन प्रक्रियाओं’ के क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में राज्य ने 130 में से 49.9 अंक प्राप्त किए हैं। इस क्षेत्र में आधार सीडिंग, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, इंटरनेट-आधारित विद्यालय प्रक्रियाएं आदि से संबंधित संकेतक शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री ने लगातार अच्छे प्रदर्शन का श्रेय टीम वर्क को देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और संसाधनों के सुदृढ़ीकरण पर सरकार का ध्यान ही शिक्षा क्षेत्र में आए इस बदलाव का मुख्य कारण है। ठाकुर ने कहा, “हमें और सुधार करने की आवश्यकता है, लेकिन हमने पिछले तीन वर्षों में अच्छी प्रगति की है।”

