हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया ने शुक्रवार को कहा कि लंबित मामलों की संख्या केवल एक सांख्यिकीय विवरण में दर्ज आंकड़ा नहीं है, क्योंकि प्रत्येक लंबित मामला एक ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो कानूनी समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है।
उन्होंने कुल्लू में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के दूसरे न्यायालय का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह नया न्यायालय न्यायिक ढांचे को मजबूत करेगा और बढ़ते कार्यभार के बीच मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
न्यायमूर्ति संधावालिया ने कहा कि कुल्लू जिले में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने न्यायिक प्रणाली को अनिवार्य रूप से प्रभावित किया है, जिससे विवादों और अपराधों में वृद्धि हुई है, विशेष रूप से मादक द्रव्यों और मनोरोग पदार्थ अधिनियम के तहत मामलों में, इसके अलावा दीवानी मुकदमेबाजी में भी वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि कुल्लू स्थित न्यायिक न्यायालय परिसर में अपीलीय न्यायालयों के समक्ष वर्तमान में लगभग 3,800 मामले लंबित हैं। न्याय व्यवस्था की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचा अपर्याप्त साबित हुआ है। इसलिए, दूसरे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना का उद्देश्य मामलों का बोझ कम करना और न्यायनिर्णय में देरी को रोकना है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी न्यायालय का उद्घाटन मात्र किसी भवन का उद्घाटन या एक और कार्यालय का सृजन करना मात्र नहीं है, क्योंकि न्यायालय इससे कहीं अधिक व्यापक अर्थ रखता है। प्राचीन कहावत, “धर्मो रक्षितः रक्षितः” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के संदर्भ में धर्म की रक्षा का अर्थ है विधि के शासन को कायम रखना, बिना किसी भय या पक्षपात, स्नेह या द्वेष के मामलों का निर्णय करना, व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें समाज के हितों के साथ संतुलित करना।
उन्होंने कहा कि नई अदालत का गठन अंततः न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास में एक निवेश का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायाधीश, वकील, अदालत के कर्मचारी और अन्य हितधारक इस विश्वास को मजबूत करने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करेंगे।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी, न्यायमूर्ति राकेश कैंथला, न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज, न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल भी उपस्थित थे।


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