मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में इस मुद्दे को ज़ोरदार तरीके से उठाए जाने के बाद, निर्वाचित प्रतिनिधियों के फोन कॉल का जवाब न देने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों को जल्द ही जांच का सामना करना पड़ सकता है। ऊना जिले के गगरेट से कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने सदन में यह मुद्दा उठाया और कुछ अधिकारियों के उदासीन रवैये पर अपनी कड़ी असंतुष्टि व्यक्त की।
कालिया ने आरोप लगाया कि कई अधिकारी विधायकों के फोन को नियमित रूप से अनदेखा करते हैं, यहां तक कि तब भी जब विधायक अपनी गंभीर जन शिकायतें उठाना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि यदि ऐसे अधिकारी जन प्रतिनिधियों के लिए अनुपलब्ध रहते हैं तो सरकार को उन्हें दिए जाने वाले टेलीफोन भत्ते पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनके इस बयान का सदन भर के विधायकों ने खुलकर समर्थन किया और सहमति जताते हुए मेजें थपथपाईं।
आरोपों का गंभीर संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने इस मामले को एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कालिया से उन अधिकारियों के नाम लिखित में देने को कहा जिन पर कॉल का जवाब न देने का आरोप है, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों पर लगे इस आरोप को “गंभीर कलंक” बताते हुए पठानिया ने सदन को आश्वासन दिया कि विवरण प्राप्त होने के बाद मामले की औपचारिक रूप से जांच की जाएगी।
कालिया ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति बनी रही तो उन्हें 200 समर्थकों के साथ राज्य की राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने के लिए विवश होना पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया, जो उनके अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधियों और जनता के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि वरिष्ठ नौकरशाहों के अनुत्तरदायी आचरण को लेकर चिंताएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, यहां तक कि मंत्रियों ने भी कथित तौर पर पार्टी मंचों के भीतर इस मुद्दे पर असंतोष व्यक्त किया है।

