July 30, 2026
Himachal

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने हरित ऊर्जा अनुसंधान के लिए विद्वानों के पहले बैच को शामिल किया

Himachal Pradesh University inducts first batch of scholars for green energy research

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला में स्थित सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी (सी-जीईएनटी) विश्वविद्यालय का पहला नवस्थापित केंद्र बन गया है जिसने पीएचडी कार्यक्रम शुरू किया है, क्योंकि इसने तीन पूर्णकालिक और तीन अंशकालिक शोधार्थियों के पहले बैच को प्रवेश दिया है।

इस बैच ने केंद्र के संकाय सदस्यों के साथ एचपीयू के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह से मुलाकात की। इस दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय में शामिल होने पर शोधार्थियों को बधाई दी और हरित एवं सतत ऊर्जा के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में उनके शोध कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

अंशकालिक शोधार्थियों में फिचनर कंसल्टिंग इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर प्रदीप कुमार शामिल हैं, जिनका डॉक्टरेट शोध हरित हाइड्रोजन भंडारण और लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित होगा और अगली पीढ़ी के हाइड्रोजन ऊर्जा प्रणालियों के विकास में योगदान देगा; फ्लोटेक्स सोलर के उपाध्यक्ष अजमल टीजे, जिनका शोध फ्लोटिंग सौर प्रौद्योगिकियों और सतत ऊर्जा उत्पादन में उनके अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा; और हिमाचल प्रदेश सरकार के ऊर्जा निदेशालय में इंजीनियर स्वाति गंगता, जिनका शोध सौर ऊर्जा प्रणालियों की तैनाती और प्रबंधन में प्रमुख चुनौतियों के समाधान में योगदान देने की उम्मीद है।

केंद्र ने विभिन्न विषयों से जुड़े तीन पूर्णकालिक शोधार्थियों का भी स्वागत किया है। कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में स्नातक भव्य भास्कर सिंगला ऊर्जा क्षेत्र के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग अनुप्रयोगों में विशेषज्ञता प्रदान करेंगी। यांत्रिक अभियांत्रिकी एवं कम्प्यूटेशनल द्रव गतिकी (सीएफडी) में विशेषज्ञता प्राप्त रजत रजनीश कृषि-फोटोवोल्टिक (एग्री-पीवी) प्रौद्योगिकियों पर शोध करेंगे। डेटा विज्ञान विशेषज्ञ अमन शर्मा सतत ऊर्जा प्रणालियों के लिए उन्नत डेटा विश्लेषण और बुद्धिमान निर्णय लेने के दृष्टिकोण में योगदान देंगे।

इस अवसर पर बोलते हुए कुलपति ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समकालीन चुनौतियों का समाधान करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार की विशेषज्ञता को एकीकृत करने के केंद्र के दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्वानों की विविध पृष्ठभूमि स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता के राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नवाचार, अंतःविषय सहयोग और प्रभावशाली अनुसंधान को बढ़ावा देगी।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि शोधार्थियों का पहला बैच वैज्ञानिक प्रगति में सार्थक योगदान देगा और केंद्र को हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान के लिए एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

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