हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के शिक्षा विभाग ने आज नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को एक स्वस्थ, जिम्मेदार और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना भी था।
कार्यक्रम का शुभारंभ एम.एड. के छात्रों अंकित भाटिया और हुसन ठाकुर के स्वागत भाषण से हुआ, जिन्होंने मुख्य अतिथि और अध्यक्ष डॉ. युद्धवीर, समन्वयक डॉ. चमन लाल बंगा, संकाय सदस्य प्रोफेसर अजय कुमार अत्री और डॉ. राकेश शर्मा, शोधार्थियों और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया।
डॉ. युद्धवीर ने अपने संबोधन में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को एक प्रमुख राष्ट्रीय चुनौती बताया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई और युवाओं से नशामुक्त भारत के मिशन में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
डॉ. बंगा ने अपने मुख्य भाषण में विकसित भारत की परिकल्पना, एनईपी 2020 के उद्देश्यों और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला। भगवद गीता और भारतीय ज्ञान प्रणाली से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने छात्रों को आत्म-अनुशासन का अभ्यास करने, व्यसन से बचने और अपनी ऊर्जा को शिक्षा, चरित्र निर्माण और सार्थक सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम में चारू और शोधार्थियों रीतु, शीतल और कृतिका ने भी भाषण दिए। उन्होंने मादक पदार्थों के सेवन के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला और छात्रों से आत्म-अनुशासन, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का आग्रह किया।


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