N1Live National रुद्रप्रयाग जाएं तो जरूर करें मध्यमहेश्वर धाम के दर्शन, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया क्यों खास है यह पवित्र स्थल
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रुद्रप्रयाग जाएं तो जरूर करें मध्यमहेश्वर धाम के दर्शन, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया क्यों खास है यह पवित्र स्थल

If you go to Rudraprayag, you must visit Madhyamaheshwar Dham, CM Pushkar Singh Dhami explained why this holy place is special.

देवभूमि उत्तराखंड, पावन नगरी पर स्थित पंचकेदारों का वैभव सबसे अनोखा है। इसी पावन नगरी में द्वितीय केदार के रूप में भगवान श्री मध्यमहेश्वर पूजे जाते हैं। चौखंबा शिखर की तलहटी में स्थित यह मंदिर न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र है, बल्कि महाभारत कालीन इतिहास और आस्था का सजीव प्रतीक भी है।

हिमालय की गोद में छिपे इस अलौकिक धाम की महिमा दूर-दूर तक फैली है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालु आते हैं। गुरुवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की महिमा का बखान किया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक खास वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में मंदिर का सुंदर दृश्य देखने को मिल रहा है। सीएम ने वीडियो पोस्ट कर लिखा, “रुद्रप्रयाग जिले में स्थित श्री मध्यमहेश्वर मंदिर पंच केदारों में दूसरे केदार के रूप में प्रसिद्ध है। यह पवित्र मंदिर ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता।”

उन्होंने लिखा, “अगर आप रुद्रप्रयाग जाएं तो इस दिव्य धाम के दर्शन जरूर करें और देवभूमि की आध्यात्मिक शांति व सुंदरता का अनुभव लें।”

मद्महेश्वर मंदिर, जिसे मदमहेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है। पंच केदार में ‘द्वितीय केदार’ के रूप में पूजित इस मंदिर में भगवान शिव के मध्य (नाभि) भाग की पूजा की जाती है। समुद्र तल से लगभग 3,497 मीटर (11,473 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।

मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की उपासना की थी। मान्यता है कि भीम ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।

यह रुद्रप्रयाग जिले के गौंडार गांव (मंसूना) में स्थित है। मंदिर के ठीक पीछे से चौखंबा और केदारनाथ पर्वत चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। मंदिर के कपाट हर साल सर्दियों में बंद हो जाते हैं और गर्मियों में दोबारा खोले जाते हैं। वर्ष 2026 में मंदिर के कपाट 21 मई को खोले गए हैं।

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