April 28, 2026
Entertainment

‘मैं अभी इतना बड़ा नहीं हुआ कि रोल चुन सकूं’, टाइपकास्ट होने के डर पर दक्ष शर्मा का बयान

‘I’m not old enough to choose roles yet’, says Daksh Sharma on the fear of being typecast

28 अप्रैल । मुंबई में हर साल हजारों लोग अभिनेता बनने का सपना लेकर आते हैं। कोई जल्दी पहचान बना लेता है, तो किसी को लंबे संघर्ष के बाद मौका मिलता है। छोटे पर्दे की दुनिया में अपनी पहचान बना रहे अभिनेता दक्ष शर्मा भी उन्हीं कलाकारों में शामिल हैं। को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर, संघर्ष, अभिनय और इंडस्ट्री में टाइपकास्ट होने जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। दक्ष ने कहा कि वह अभी अपने करियर के ऐसे दौर में नहीं हैं, जहां वह अपनी पसंद से किरदार चुन सकें।

उन्होंने कहा, ”मैं खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं मानता। एक अभिनेता के पास हर तरह के किरदार आ सकते हैं, और हर किरदार अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आता है। अभी तक मुझे अलग-अलग तरह के रोल निभाने का मौका मिला है। कुछ किरदारों में नकारात्मक छवि थी, कुछ बहुत मासूम थे, जबकि कुछ भावनात्मक रूप से बेहद गहरे थे। कलाकार पूरी तरह यह तय नहीं कर सकता कि उसके पास किस तरह का काम आएगा। ऐसे में जरूरी यह है कि जो भी मौका मिले, उसमें पूरी मेहनत और ईमानदारी दिखाई जाए।”

उन्होंने आगे कहा, ”अगर कोई कलाकार लगातार ऑडिशन देता रहे और मेहनत करता रहे, तो समय के साथ उसे अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का अवसर जरूर मिलता है। अभिनय की दुनिया में धैर्य बहुत जरूरी होता है। कई बार कलाकारों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।”

दक्ष शर्मा ने कहा, ”मैं अभी इतना बड़ा अभिनेता नहीं बना हूं कि अपने हिसाब से रोल चुन सकूं। शुरुआती दौर में ज्यादातर कलाकारों का ध्यान अच्छा काम पाने और खुद को साबित करने पर होता है। मेरे लिए इस समय सबसे जरूरी बात यह है कि मुझे अच्छे लोगों के साथ काम करने और सीखने का मौका मिले। हर नया प्रोजेक्ट मुझे कुछ नया सिखाता है और यही सीख आगे जाकर मेरे अभिनय को बेहतर बनाती है।”

उन्होंने ऑडिशन को लेकर कहा, ”शुरुआत में मुझे किसी दूसरे किरदार के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह रोल मुझे नहीं मिला। उस समय मैं एक दूसरे शो में काम कर रहा था। बाद में उसी टीम की तरफ से मुझे फिर से फोन आया और इस बार मुझे नकुल नाम के किरदार के लिए चुना गया। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि मुझे कुछ भी समझने का समय नहीं मिला। दिन में फोन आया और रात तक यह तय हो गया कि अगले ही दिन शूटिंग शुरू करनी है। अगले दिन मैं सीधे सेट पर पहुंच गया।”

दक्ष शर्मा ने कहा, ”लोग अक्सर अदाकारी को बहुत सहज और असली मानते हैं, लेकिन यह सब लगातार सीखने और अनुभव से आता है। जब कोई कलाकार लंबे समय तक काम करता है, लोगों को देखता और समझता है, तब अभिनय धीरे-धीरे उसके अंदर स्वाभाविक रूप से आने लगता है। मैं अभिनय को बहुत बनावटी तरीके से करने में विश्वास नहीं रखता। मेरा मानना है कि जितना सहज होकर अभिनय किया जाए, दर्शक उससे उतना ही ज्यादा जुड़ते हैं।”

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