January 21, 2026
National

देवघर में बसंत पंचमी पर बाबा बैद्यनाथ को तिलक चढ़ाएंगे मिथिलांचल से आए ‘ससुरालिए, उमड़ रहा आस्था का सैलाब

In Deoghar, the ‘in-laws’ from Mithila region will offer Tilak to Baba Baidyanath on Basant Panchami, a wave of faith is rising.

भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ बाबा बैद्यनाथ धाम में बसंत पंचमी के पावन पर्व से पहले ही आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ पड़ा है, जो अपने आप में अद्भुत और अविस्मरणीय है। चारों ओर ‘बाबा बैद्यनाथ’ के जयघोष गूंज रहे हैं और वातावरण शिवमय हो गया है।

बसंत पंचमी के दिन शुक्रवार को देशभर में मां सरस्वती की आराधना होगी, उसी दिन देवघर में बाबा बैद्यनाथ का पारंपरिक तिलकोत्सव मनाया जाएगा। तिलक-अभिषेक के बाद लाखों श्रद्धालु अबीर-गुलाल के साथ उल्लास में डूब जाएंगे। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मिथिलांचल और देवघर की सांस्कृतिक आस्था का जीवंत प्रतीक है।

हर वर्ष बसंत पंचमी से दो-तीन दिन पहले ही बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगती है। इस बार 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस आस्था के सैलाब के पीछे गहरी लोकमान्यता जुड़ी है।

मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और भगवान शंकर मिथिला के दामाद। मिथिलांचल क्षेत्र नेपाल की तराई से लेकर बिहार के बड़े हिस्से तक फैला है। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उत्सव से पहले मिथिलांचल के लाखों श्रद्धालु बसंत पंचमी के दिन देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का तिलक करते हैं और जलार्पण कर अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं।

इस बार भी बाबा की ‘ससुराल’ माने जाने वाले मिथिलांचल से एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहले ही देवघर पहुंच चुके हैं। तिरहुत, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, कोसी क्षेत्र, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधेपुरा, मुंगेर और नेपाल के तराई इलाकों से आए श्रद्धालुओं से पूरा देवघर गुलजार है।

खास बात यह है कि ये श्रद्धालु होटल या धर्मशाला में ठहरने के बजाय खुले मैदानों या सड़कों के किनारे ही रुकते हैं। इसके पीछे मिथिलांचल की यह मान्यता है कि दामाद के घर जाकर ठहरना उचित नहीं होता। अधिकांश श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर 108 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा पैदल तय कर बाबा के दरबार तक पहुंचे हैं। रास्ते भर नचारी और वैवाहिक गीत गाते हुए वे भोलेनाथ को रिझाते हैं। वसंत पंचमी के दिन जलार्पण के साथ बाबा को अपने खेत की पहली फसल की बाली और घर में बने शुद्ध घी का भोग अर्पित किया जाएगा।

इसके बाद अबीर-गुलाल के साथ उत्सव मनाया जाएगा। मिथिलांचल में इसी दिन से होली के आगमन की शुरुआत मानी जाती है। बसंत पंचमी के दिन श्रृंगार पूजा से पहले बाबा पर फुलेल लगाया जाएगा और लक्ष्मी नारायण मंदिर में पुजारियों द्वारा तिलक की विधि संपन्न कराई जाएगी। इसके ठीक 25 दिन बाद महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर और माता पार्वती का दिव्य विवाह रचाया जाएगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है।

उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बाबा मंदिर क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। बसंत पंचमी के दौरान वीवीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। केवल शीघ्र दर्शनम कूपन की सुविधा जारी रहेगी, जिसकी दर अस्थायी रूप से बढ़ाई गई है।

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