भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को पूर्व डिप्लोमैट और विशेषज्ञ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बड़ी कूटनीतिक जीत करार दे रहे हैं। पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी ने कहा कि लगभग एक साल में भारत ने अपने एक्सपोर्ट को डायवर्सिफाई किया और ट्रंप टैरिफ के खिलाफ मोर्चाबंदी कर दी।
पूर्व डिप्लोमैट जेके त्रिपाठी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर कहा, “ट्रंप ने जो टैरिफ हटाया है, वह उसकी मजबूरी है। पिछले एक साल, खासतौर से पिछले छह महीने से हमने जो ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ काम किया है, उससे वह परेशान है। पिछले साल की शुरुआत में ईएफटीए के साथ हमने ट्रेड डील की। इसके बाद ब्रिटेन, फिर जर्मनी और फिर ईयू के साथ एफटीए किया। इस सबका परिणाम ये है कि ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ और अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ हमने अच्छी मोर्चेबंदी कर ली और अपने एक्सपोर्ट को हमने डायवर्सिफाई कर लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “ट्रंप की सरकार को लगने लगा था कि अब अगर हम व्यापार समझौता नहीं करेंगे, तो पिछड़ जाएंगे, क्योंकि भारत का बाजार 140 करोड़ लोगों का है। इसलिए उन्होंने आनन-फानन में ट्रेड डील कर ली। हालांकि, वो तरह-तरह के बहाने दे रहे हैं कि पीएम मोदी के कहने पर किया है।”
इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक पल है। भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी डेमोक्रेटिक ताकतें हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 2 बिलियन है। इस तरह के व्यापार समझौते का वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा और इसके बहुत सकारात्मक और फायदेमंद परिणाम होने की उम्मीद है।”
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “शुरू में यूरोप के साथ हमारी डील, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जाता है, ने दुनिया को हैरान कर दिया। आज, हमें बहुत अच्छी खबर मिली है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के तहत इंडिया में बने सभी प्रोडक्ट्स, जो अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा हैं, उन्हें फायदा होगा, क्योंकि हमारे टैरिफ 18 प्रतिशत पर सेट किए गए हैं, जो दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है। मुझे कहना होगा, इसका क्रेडिट प्रधानमंत्री के सब्र, डिप्लोमेसी और विजन को जाता है, जो बहुत तारीफ के काबिल हैं।”


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