पंजाब में कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनकर उभरा है, जिससे प्रतिदिन औसतन आठ महिलाओं की जान जा रही है। राज्यसभा सदस्य बलबीर सिंह सीचेवाल ने मौजूदा बजट सत्र के पहले चरण के दौरान एक विशेष उल्लेख के माध्यम से संसद का ध्यान इस चिंताजनक स्थिति की ओर आकर्षित किया।
राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत नवीनतम आंकड़ों का हवाला देते हुए, सीचेवाल ने सदन को सूचित किया कि अकेले वर्ष 2025 के दौरान पंजाब में कैंसर से लगभग 2,700 महिलाओं की मृत्यु हुई। यह आंकड़ा प्रतिदिन औसतन आठ मौतों को दर्शाता है। इसी रिपोर्ट के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच राज्य में कैंसर से कुल 13,299 महिलाओं की मौत हुई, जो स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है।
उन्होंने आगे बताया कि इस अवधि के दौरान स्तन कैंसर से सबसे अधिक 7,186 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से 3,502 मौतें हुईं, जबकि गर्भाशय के कैंसर से 2,611 महिलाओं की जान गई। सीचेवाल ने कहा कि ये आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि समाज और नीति निर्माताओं दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।
उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 50 से 56 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो दर्शाता है कि यह बीमारी अब केवल वृद्धावस्था तक ही सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति व्यापक पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य विफलता को दर्शाती है, जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
कैंसर के बढ़ते मामलों के संभावित कारणों पर प्रकाश डालते हुए सांसद ने पर्यावरण प्रदूषण, विशेष रूप से दूषित पेयजल को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया। उन्होंने सदन को बताया कि कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग का मानव स्वास्थ्य पर सीधा और हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है। अतीत के अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि डीडीटी जैसे खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध तभी लगाया गया जब माताओं के दूध में उनके अवशेष पाए गए, जिससे अनियंत्रित रासायनिक उपयोग के दीर्घकालिक परिणामों का खुलासा हुआ।
केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष जोरदार मांग उठाते हुए सीचेवाल ने आग्रह किया कि महिलाओं के लिए शत प्रतिशत मुफ्त कैंसर उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कैंसर उपचार के लिए कम से कम 75 से 80 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जानी चाहिए, चाहे उपचार सरकारी या निजी अस्पतालों में कराया जाए। उन्होंने कहा कि कैंसर रोगियों को सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष देखभाल, सम्मान और एक समान उपचार मिलना चाहिए।
अपने संबोधन के समापन में, सीचेवाल ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि महिलाएं ही परिवारों और समुदायों की नींव हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या केवल स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय नहीं है, बल्कि पंजाब की भावी पीढ़ियों और उसके अस्तित्व से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है।

