12 फरवरी । अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर चर्चाओं के बीच फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल (एफईसीसी) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रियम गांधी मोदी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भारत की वैश्विक स्थिति को लेकर कई बड़ी बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उससे जुड़े इकोसिस्टम के विस्तार में भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन-चार देशों में शामिल है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि संभावित ट्रेड डील में किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
प्रियम गांधी मोदी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत ने एआई और उससे जुड़े इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक स्तर पर एआई और उससे जुड़े क्षेत्रों को तेजी से विकसित करने वाले शीर्ष तीन या चार देशों में शामिल है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सरकार को बधाई भी दी।
अमेरिका-भारत संभावित व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश का स्वागत है, लेकिन समझौते की पूरी शर्तें अभी तय होनी बाकी हैं। दोनों सरकारों द्वारा विस्तृत जानकारी जारी किए जाने के बाद ही इस पर ठोस टिप्पणी की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्सर उन पहलों का भी विरोध करता है जो देश के हित में होती हैं। यदि वे किसी कदम का विरोध कर रहे हैं, तो संभव है कि वह देश के लिए फायदेमंद ही हो। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समझौते पर अंतिम राय देने से पहले उसके पूरे विवरण सामने आने का इंतजार करना चाहिए। इस ट्रेड डील में सरकार का रुख स्पष्ट है कि किसानों और डेयरी सेक्टर के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएंगे।
प्रियम गांधी मोदी ने वैश्विक आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कोविड-19 महामारी, स्वेज नहर में अवरोध और मौजूदा टैरिफ परिस्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समान सोच रखने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना में विश्वास करता है, यानी दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ना। इसी सोच के साथ देशों और नेताओं के बीच सहयोग के अनंत अवसर पैदा किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से ‘ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ नामक एक मंच की स्थापना की गई है, ताकि वैश्विक नेता भारत में एकत्र होकर महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकें।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के सहयोग से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को स्थिर और समृद्ध आर्थिक भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
आगामी 17 से 19 फरवरी तक मुंबई में पहले वैश्विक आर्थिक सहयोग 2026 (जीईसी) सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारत और विदेशों के वरिष्ठ नीति निर्माता, वैश्विक व्यापार जगत के नेता, निवेशक और बहुपक्षीय संस्थानों के प्रमुख एकत्रित होंगे। यह शिखर सम्मेलन एफईसीसी द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो एक गैर-लाभकारी मंच है, और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के साथ साझेदारी में है।

