April 6, 2026
World

भारत ने संकट से जूझ रहे अफ्रीकी देशों मोजाम्बिक, मलावी और बुर्किना फासो को भेजी खाद्य सहायता

India sends food aid to crisis-hit African countries Mozambique, Malawi and Burkina Faso

 

नई दिल्ली, भारत ने वैश्विक दक्षिण के विकास और मानवीय सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए अफ्रीकी देशों मोजाम्बिक, मलावी और बुर्किना फासो को खाद्य सहायता प्रदान की है।

 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने सूखा प्रभावित मलावी को 1,000 मीट्रिक टन चावल, बुर्किना फासो को 1,000 मीट्रिक टन चावल और बाढ़ प्रभावित मोजाम्बिक को 500 मीट्रिक टन चावल के साथ राहत सामग्री भेजी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत ने बुर्किना फासो को मानवीय सहायता के रूप में 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। इसका उद्देश्य कमजोर समुदायों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह पहल वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक विश्वसनीय विकास और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत भागीदार के रूप में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

यह मानवीय पहलू ऐसे समय में सामने आया है, जब कई अफ्रीकी देश गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

बुर्किना फासो इस क्षेत्र के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक से जूझ रहा है, जहां लाखों लोगों को सहायता की आवश्यकता है। इसके अलावा, 2022 के तख्तापलट के बाद से इस्लामिक उग्रवादी समूहों से जुड़ी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता भी जारी है।

यरूशलेम पोस्ट के एक लेख के अनुसार, मलावी अल नीनो से जुड़े सूखे के कारण खाद्य संकट का सामना कर रहा है, जबकि मोजाम्बिक में विनाशकारी बाढ़ आई है।

वहीं, दूसरी ओर भारत अब केवल राहत सामग्री भेजने से आगे की सोच रहा है। 31 मार्च को सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के एक वर्किंग पेपर में कहा गया है कि अफ्रीका के पास वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण और ट्रांजिशन मिनरल्स का 30 प्रतिशत से अधिक भंडार हैं। इसमें सुझाव दिया गया है कि भारत को केवल मिनरल्स निकालने या रियायती वित्तपोषण से आगे बढ़कर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, वर्कफोर्स ट्रेनिंग और साझा मूल्य निर्माण पर आधारित साझेदारियों की ओर बढ़ना चाहिए।

लेख में बताया गया है कि यह पेपर जाम्बिया, जिम्बाब्वे और तंजानिया पर भविष्य के सहयोग के लिए मुख्य उदाहरणों के तौर पर फोकस करता है।

लेख के अनुसार, “मानवीय सहायता और संसाधन कूटनीति का संयोजन दर्शाता है कि भारत अफ्रीका में अपनी बड़ी भूमिका चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन और अमेरिका पहले से ही प्रभाव, बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह रणनीति मानवीय भी है और व्यावहारिक भी।”

Leave feedback about this

  • Service