9 मई । भारत ने नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘इंडियन ओशन डायलॉग’ के 10वें संस्करण का आयोजन किया। इस मंच पर हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़े देशों के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा, व्यापार, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
भारत ने 7-8 मई 2026 को नई दिल्ली में ‘इंडियन ओशन डायलॉग’ के 10वें संस्करण की मेजबानी की, जिसका विषय था ‘बदलती दुनिया में हिंद महासागर क्षेत्र’।
यह संवाद विदेश मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (आईओआरए) सचिवालय के साथ मिलकर आयोजित किया। इसमें आईओआरए के सदस्य देशों और संवाद साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, विद्वान और विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों और नई चुनौतियों पर चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मॉरीशस के क्षेत्रीय एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री धनंजय रामफुल और यमन के राज्य मंत्री वलीद मोहम्मद अल कदीमी ने वहां मौजूद लोगों को सम्बोधित किया।
उन्होंने बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक माहौल में क्षेत्रीय सहयोग, सामूहिक सुरक्षा और टिकाऊ विकास को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
आईओडी, आईओआरए का एक प्रमुख ट्रैक 1.5 मंच है, जहां साझा रणनीतिक मुद्दों पर खुलकर और सकारात्मक तरीके से चर्चा होती है। इनमें समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, व्यापार और निवेश और टिकाऊ विकास जैसे विषय शामिल हैं। इससे पहले भारत इस संवाद के तीन संस्करण आयोजित कर चुका है। पहला 2014 में केरल में, छठा 2019 में नई दिल्ली में और आठवां 2021 में वर्चुअल तरीके से हुआ था।
इस बार का संवाद इसलिए भी खास रहा, क्योंकि भारत ने 2025-27 के लिए आईओआरए की अध्यक्षता संभाली है। भारत ने फिर दोहराया कि वह शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह सोच भारत के ‘महासागर’ विजन (क्षेत्रों में सिक्योरिटी और ग्रोथ के लिए म्यूचुअल और होलिस्टिक एडवांसमेंट) और ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ नीति से प्रेरित है।
समापन सत्र में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने विशेष संबोधन दिया। वहीं, सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने भारत की आईओआरए अध्यक्षता के दौरान प्राथमिकताओं और चर्चा से निकले मुख्य निष्कर्षों पर बात की।
इस संवाद में हुई चर्चाओं से उम्मीद है कि आईओआरए के भीतर क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।


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