एक अमेरिकी नीति विशेषज्ञ के अनुसार, भारत के केंद्रीय बजट से साफ संकेत मिलता है कि नई दिल्ली ग्लोबल कैपिटल, टैलेंट और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी को आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस पूरी रणनीति के केंद्र में प्रवासी भारतीय यानी एनआरआई को रखा गया है।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज में नीति और पॉलिसी और स्ट्रेटेजी चीफ खंडेराव कांड ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह बजट ऐसे समय में पेश किया गया है, जब दुनिया भर में आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद बजट भारत के आत्मविश्वास को दिखाता है।
उन्होंने बताया कि बजट में एनआरआई के लिए भारतीय इक्विटी में निवेश करना पहले से ज्यादा आसान बना दिया गया है। व्यक्तिगत और कुल निवेश की सीमा बढ़ाने से एनआरआई अब सीधे बाजार में अधिक आसानी और भरोसे के साथ निवेश कर सकेंगे।
इसके साथ ही, एनआरआई से जुड़े संपत्ति लेन-देन की पुरानी समस्याओं को भी काफी हद तक दूर किया गया है। नए बदलावों से कंप्लायंस का बोझ कम होगा और विदेश में रहने वाले भारतीय अपनी संपत्ति को आसानी से बेच या खरीद सकेंगे, जिससे रियल एस्टेट बाजार में तरलता बढ़ेगी।
खंडेराव कांड ने कहा कि ये सभी कदम मिलकर एनआरआई के लिए निवेश का माहौल साफ, सरल और ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत भविष्य की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले ले रहा है। उदाहरण के तौर पर इंडिया एआई पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और क्लाउड क्षमता के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर एआई तकनीक अपनाने और फैलाने वाला देश बनने में मदद मिलेगी।
खंडेराव ने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के विस्तार पर 40 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर के निर्माण से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा विनिर्माण में सप्लाई-चेन लचीलापन मजबूत होगा।
रक्षा बजट बढ़ाकर 7.8 लाख करोड़ रुपये करना भी तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि बजट 2026 एक आत्मविश्वासी और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जो एनआरआई के लिए बेहतर निवेश के रास्ते खोलता है और एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखता है।
खंडेराव ने कहा कि एक मजबूत भारत अमेरिकी रणनीतिक हितों के साथ भी मेल खाता है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक ग्लोबल पार्टनर के रूप में, एक मजबूत भारत अमेरिका के लिए बेहतर है, खासकर इंडो-पैसिफिक में चीन का मुकाबला करने के लिए।”


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