April 3, 2026
National

भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में 2015 से अब तक हुआ 39,272 करोड़ रुपए का निवेश, समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात हुआ दोगुना

India’s fisheries sector has seen investments of Rs 39,272 crore since 2015, with seafood exports doubling.

3 अप्रैल । केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र (फिशरीज सेक्टर) अब खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला क्षेत्र बन गया है। साल 2015 से अब तक इस सेक्टर में रिकॉर्ड 39,272 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, यह सेक्टर प्राथमिक स्तर पर करीब 3 करोड़ मछुआरों और मछली पालकों को रोजगार देता है, जबकि पूरी वैल्यू चेन में इससे लगभग दोगुने लोगों को रोजगार मिलता है।

मंत्रालय के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है।

देश में मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है, जो औसतन करीब 7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

समुद्री उत्पादों का निर्यात भी पिछले दशक में दोगुना से ज्यादा हो गया है। यह 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपए पहुंच गया है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का है, जिसकी कीमत 43,334 करोड़ रुपए रही।

भारत अब करीब 130 वैश्विक बाजारों में 350 से ज्यादा तरह के समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को गया, इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व का स्थान रहा।

निर्यात में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई है और इसकी कुल कीमत 742 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।

इस बीच, कुछ चुनिंदा उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत ट्यूना, सीबास, कोबिया, मड क्रैब, टाइगर श्रिम्प और समुद्री शैवाल (सीवीड) जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाह और डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम में निवेश किया जा रहा है।

भारत को 2025 में अमेरिका के समुद्री स्तनधारी संरक्षण अधिनियम (एमएमपीए) के तहत ‘कम्पैरेबिलिटी’ का दर्जा भी मिला है, जिससे उसके सबसे बड़े बाजार में समुद्री उत्पादों का निर्यात बिना रुकावट जारी रहेगा।

सरकार ने बताया कि तटीय राज्यों में झींगा पकड़ने वाले ट्रॉलर में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइसेस (टीईडी) लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

नियामकीय स्तर पर, सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बना दिया गया है और इसे नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर सिर्फ 72 घंटे रह गया है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार वैल्यू-एडेड निर्यात को और बढ़ाने, इनलैंड एक्सपोर्ट हब विकसित करने और यूके, यूरोपीय संघ, एसियन (एएसईएएन) और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में भारत की मौजूदगी मजबूत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

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