N1Live National मजबूत रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर 9 प्रतिशत हो जाएगी: नितिन गडकरी
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मजबूत रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर 9 प्रतिशत हो जाएगी: नितिन गडकरी

India's logistics cost will reduce by 9 percent due to strong road infrastructure: Nitin Gadkari

30 अप्रैल । केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत में तेजी से हो रहे सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कारण लॉजिस्टिक्स लागत घटकर करीब 9 प्रतिशत तक आ जाएगी।

एक बयान में कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आईआईटी बैंगलोर, आईआईटी कानपुर और आईआईटी चेन्नई द्वारा छह महीने पहले किए गए शोध से पता चला है कि रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से लॉजिस्टिक्स लागत पहले ही 6 प्रतिशत घटकर लगभग 10 प्रतिशत रह गई है।

मंत्री ने कहा, “पहले भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का लगभग 16 प्रतिशत थी, जबकि चीन में करीब 18 प्रतिशत और अमेरिका व यूरोप में लगभग 12 प्रतिशत थी।”

नितिन गडकरी ने यह बातें ईईपीसी इंडिया के 57वें नेशनल अवॉर्ड समारोह में कही। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ तरीके निर्यात बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं।

उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग निर्यात से विदेशी मुद्रा कमाने में मदद मिलती है, रोजगार पैदा होते हैं और उद्योगों का विकास होता है।

मंत्री ने कहा कि देश में 36 ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं, जो लॉजिस्टिक्स लागत को काफी हद तक बदल देंगे।

गडकरी ने यह भी बताया कि भारत का दोपहिया उद्योग अपने उत्पादन का करीब 50 प्रतिशत निर्यात कर रहा है।

उन्होंने कहा, “अब मर्सिडीज से लेकर दुनिया के सभी बड़े ब्रांड भारत में मौजूद हैं और यहां से अपनी कारों का निर्यात करने की योजना बना रहे हैं। मुझे याद है, लगभग 6 से 8 महीने पहले, जब मुझे एक इलेक्ट्रिक मर्सिडीज लॉन्च करने का अवसर मिला तो मर्सिडीज के चेयरमैन ने मुझे बताया कि उन्होंने अब 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारों की ओर बढ़ने का फैसला किया है और उनका विनिर्माण केंद्र भारत में होगा।”

गडकरी ने बताया कि भारत का ऑटो सेक्टर हाल ही में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

भारत का ऑटो उद्योग करीब 22 लाख करोड़ रुपए का है, जबकि अमेरिका और चीन इससे आगे हैं।

गडकरी ने कहा कि नई तकनीक, नवाचार और वैकल्पिक ईंधन तथा बायोफ्यूल के क्षेत्र में काम करके भारत दुनिया में नंबर-1 बन सकता है। उन्होंने अगले पांच साल में इस लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद जताई।

उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे अपने माल को फैक्ट्री से बंदरगाह तक ले जाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों का इस्तेमाल करें।

ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों में दिक्कतों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 122.43 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.86 प्रतिशत ज्यादा है।

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