भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात (हस्तशिल्प सहित) 2023-24 के 2,97,004 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 3,25,339 करोड़ रुपए हो गया। इस अवधि में निर्यात में 4.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई। यह जानकारी मंगलवार को संसद में दी गई।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि इस दौरान अमेरिका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय टेक्सटाइल और परिधान निर्यात के शीर्ष पांच गंतव्य रह हैं। वहीं, 2025-26 में 2024-25 की तुलना में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात की नियमित निगरानी कर रही है तथा निर्यातकों और उद्योग सहित सभी हितधारकों के साथ मिलकर चुनौतियों के प्रभाव को कम करने और उत्पादन व निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग को बढ़ावा देने के साथ इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए कई योजनाएं और पहल लागू कर रही है, जिनका सकारात्मक असर निर्यात वृद्धि के रूप में दिखाई दे रहा है।
प्रमुख योजनाओं में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, समर्थ (टेक्सटाइल क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना), सिल्क समग्र-2, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम, समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना, आरओएससीटीएल, आरओडीटीईपी, निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) और निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसई) शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों को शामिल करते हुए निर्यात प्रोत्साहन और बाजार विविधीकरण की रणनीति भी अपनाई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में 16 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) लागू हैं, जिनमें भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) भी शामिल है। वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) और न्यूजीलैंड के साथ संपन्न एफटीए भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को निर्यात बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार का अवसर प्रदान करेंगे।
इसके अलावा, पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन संबंधी चुनौतियों से प्रभावित निर्यातकों को सहायता देने के लिए सरकार ने 19 मार्च 2026 को निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत रिलीफ पहल शुरू की। सरकार ने टेक्सटाइल और परिधान उत्पादन के लिए कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से माफ कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य कपास क्षेत्र की प्रमुख बाधाओं को दूर करना, उत्पादकता बढ़ाना और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का समाधान करना है।


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