March 2, 2026
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अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता का संकट

Iran’s power crisis after Ayatollah Ali Khamenei

 

वॉशिंगटन,ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों के बाद इस्लामिक गणराज्य अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है। अमेरिका के सांसदों और ईरानी अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि तेहरान की सत्ता संरचना में आगे क्या होगा, इसे लेकर गहरी असमंजस की स्थिति है।

 

अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन टॉम कॉटन ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि सैन्य अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों में अमेरिकी जनता ईरान की मिसाइलों, उनके लॉन्चरों और अंततः उनकी मिसाइल निर्माण क्षमता पर व्यवस्थित और सुनियोजित कार्रवाई देखेगी।”

सीबीएस न्यूज से बातचीत में कॉटन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की “ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेजने की कोई योजना नहीं है”, बल्कि एक विस्तारित हवाई और नौसैनिक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ईरान क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों, अरब सहयोगियों और इज़रायल को निशाना बनाना जारी रख सकता है।

वहीं, सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के वाइस चेयरमैन मार्क वार्नर ने सीएनएन से कहा कि खामेनेई के हटने के बाद ईरान के भीतर क्या होगा, इसे लेकर अमेरिका के पास “बहुत कम स्पष्टता” है।

एबीसी न्यूज पर डेमोक्रेटिक सीनेटर एडम शिफ ने व्यापक सैन्य अभियान की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “शासन परिवर्तन के उद्देश्य से इतना बड़ा सैन्य अभियान चलाने का कोई आधार नहीं था।” शिफ ने यह भी कहा कि ईरान से अमेरिका पर कोई तात्कालिक हमले का खतरा नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह “खुश हैं कि वह शासन चला गया” और “उस भयानक शासन का नेता अब नहीं रहा”, लेकिन अमेरिकी सैनिकों द्वारा किसी आंतरिक विद्रोह का समर्थन करने की अपेक्षा से सावधान रहने की जरूरत है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा, “अमेरिका जो कर रहा है वह आक्रामकता का कृत्य है, और हम जो कर रहे हैं वह आत्मरक्षा है।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हम अपनी रक्षा कर रहे हैं, चाहे इसके लिए जो भी करना पड़े।”

वॉशिंगटन, जहां सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत दे रहा है, वहीं तेहरान इन हमलों को अवैध आक्रामकता बता रहा है। इन परस्पर विरोधी बयानों से यह साफ है कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी, इस पर अभी गहरा संशय बना हुआ है।

 

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