विधानसभा में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर आज ऊना में राज्य भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ की कार्यकारी समिति की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह बैठक आगामी पंचायती राज चुनावों के लिए भाजपा की तैयारियों पर चर्चा करने और इन चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित की गई थी।
बैठक से पहले मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार आपदा प्रबंधन अधिनियम के लागू होने का हवाला देकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि राज्य में आपदा आए सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने धन की कमी का हवाला देते हुए न तो प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाई है और न ही क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत की है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव हर पांच साल में होते हैं। राज्य सरकार की टालमटोल की रणनीति को चुनौती देते हुए कुछ लोगों ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को फरवरी के अंत तक चुनाव की तैयारियां पूरी करने और अप्रैल में चुनाव कराने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री को भी फरवरी के अंत तक सभी चुनावी औपचारिकताएं पूरी कर अप्रैल के अंत तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने स्वयं अदालत के आदेशों का अनादरपूर्वक विरोध किया, और उच्च न्यायालय को इस मामले का संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करना चाहिए।
राज्य कांग्रेस नेतृत्व द्वारा ‘विक्षित भारत’ ग्राम-ग्राम योजना के विरोध का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार है कि कोई मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो देश में संघीय ढांचे के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एमजीएनआरईजीए योजना को बंद नहीं कर रही है, बल्कि उसे मजबूत कर रही है।

