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शिमला नगर निगम चुनाव नतीजों को पूरे हिमाचल का जनादेश बताना गलत, पंचायत चुनावों के बाद साफ होगी तस्वीर : नरेश चौहान

It is wrong to call the Shimla Municipal Corporation election results a mandate for the entire Himachal; the picture will be clear after the Panchayat elections: Naresh Chauhan

हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनावों के नतीजों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां इन परिणामों को प्रदेश की जनता का मूड बता रही है, वहीं मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि चार नगर निगमों के चुनावों के आधार पर पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर तय नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि असली स्थिति ग्रामीण और पंचायत चुनावों के परिणाम आने के बाद स्पष्ट होगी।

नरेश चौहान ने कहा कि सोलन और धर्मशाला में मुकाबला बेहद करीबी रहा। सोलन में यदि कांग्रेस को थोड़ा और समर्थन मिल जाता तो मुकाबला 8-8 सीटों पर बराबरी का हो सकता था, क्योंकि वहां एक निर्दलीय उम्मीदवार भी था। उन्होंने स्वीकार किया कि सोलन में कुछ कमियां जरूर रहीं, जिनकी पार्टी स्तर पर समीक्षा की जाएगी। स्थानीय नेताओं, उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर यह समझा जाएगा कि अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं हो पाया।

भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल की तरह हिमाचल में भी राजनीतिक बदलाव की बात पर चौहान ने कहा कि दोनों राज्यों की परिस्थितियों की तुलना करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के मतदाता बेहद जागरूक और समझदार हैं, तथा वे जानते हैं कि प्रदेश के हित में कौन काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनके बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं गया था। शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, दूध के दाम बढ़ाने, नशे के खिलाफ अभियान और कर्मचारियों को ओपीएस देने जैसे फैसलों का लाभ अब लोगों तक पहुंचना शुरू हुआ है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा बताए कि इनमें से कौन सा फैसला गलत है।

नरेश चौहान ने भाजपा पर प्रदेश के मुद्दों पर चुप रहने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आपदा के समय केंद्र से मिलने वाली मदद और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपए की राशि जैसे विषयों पर भाजपा को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल आलोचना करने के बजाय प्रदेश के हितों की बात करे।

नरेश चौहान ने कहा कि नगर निगम चुनाव केवल चार विधानसभा क्षेत्रों और सीमित शहरी मतदाताओं तक सीमित थे। एक विधानसभा क्षेत्र में जहां 80 से 90 हजार मतदाता होते हैं, वहीं नगर निगम चुनावों में केवल लगभग 15 हजार शहरी मतदाताओं ने भाग लिया। इसलिए इसे पूरे प्रदेश का रुझान बताना तर्कसंगत नहीं है।

उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में 51 नगर निकायों के चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला था और पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं अब जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिलने की जानकारी सामने आ रही है।

नरेश चौहान ने कहा कि पालमपुर में कांग्रेस को स्पष्ट जनसमर्थन मिला, जबकि मंडी में भाजपा को सफलता मिली। धर्मशाला और सोलन में मुकाबला बेहद करीबी रहा। उन्होंने कहा कि केवल 922 वोटों के अंतर को पूरे प्रदेश का जनादेश बताना सही नहीं है। कांग्रेस को भरोसा है कि जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के परिणाम आने के बाद प्रदेश की वास्तविक राजनीतिक तस्वीर सामने आ जाएगी और भाजपा के दावे स्वतः गलत साबित हो जाएंगे।

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