जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखने की बात कही है। उन्होंने सभी धरना-प्रदर्शनों और मार्च के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य किए जाने तथा हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
आईएएनएस से बातचीत में प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “मैंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सभी भूख हड़ताल, धरना, प्रदर्शन और मार्च के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए। जो लोग बिना अनुमति के ऐसे कार्यक्रम करते हैं, अराजकता फैलाते हैं या हिंसा में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा, “पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संविधान की रक्षा के लिए संवैधानिक दायरे में आवश्यक बल प्रयोग का अधिकार होना चाहिए। दिल्ली में विपक्षी नेताओं का प्रदर्शन पूरी तरह देश-विरोधी है। प्रदर्शन कर रहे लोगों के हाथों में तिरंगा था, लेकिन उन्होंने वाहनों में तोड़फोड़ की, पत्रकारों पर हमला किया और प्रशासन को निशाना बनाया। उन्होंने आंसू गैस के गोले भी फेंके। उन्हें यह सब कहां से मिला?”
उन्होंने आगे कहा, “यह छात्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश को बांटने के लिए देश-विरोधी तत्वों की साजिश है। जरूरत पड़ने पर पुलिस को ऐसे लोगों पर गोली चलाने का अधिकार दिया जाना चाहिए। देश से बड़ा कुछ नहीं है और सभी को संविधान के दायरे में रहना चाहिए। यदि कोई संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करता है और कानून अपने हाथ में लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लोग संसद का घेराव करने तक पहुंच गए हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?”
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम बिल को रोकने के लिए बड़ा षड्यंत्र किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के नाम पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से संसद भवन का असंवैधानिक तरीके से घेराव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस को पूरी छूट मिलनी चाहिए।


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