अर्बन एस्टेट फेज वन (यूई-1) जालंधर के निवासियों ने जालंधर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से ग्रीन पार्क बेल्ट और तीस फुट सड़क को मूल अनुमोदित लेआउट योजना के रूप में नहीं बनाने पर सवाल उठाया है।
निवासी हरविंदर सिंह ने बताया कि अर्बन एस्टेट फेज वन (यूई-1) जालंधर निवासी, जिन्होंने वर्ष 2010 के बाद यहां इनबिल्ट मकान खरीदे हैं, वे अपने मकान नंबर 1-8 के पीछे कुल 2500 वर्ग गज खाली जमीन पर ग्रीन पार्क बेल्ट और तीस फुट सड़क बनाने के लिए जालंधर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के साथ फॉलोअप कर रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि जेडीए द्वारा स्थापित वर्ष 2010 के गाइड मैप में ग्रीन पार्क व सड़कें दर्शाई गई थीं, जो वर्ष 2010 से जनवरी 2025 तक पंद्रह साल तक कॉलोनी की मुख्य सड़क पर ही खड़ी रहीं और अब जनवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में जेडीए ने इन्हें हटा दिया है। हालांकि, जेडीए में जमीन के बारे में दायर आरटीआई से पता चला है कि निवासियों के घरों के पीछे कुल 2500 वर्ग गज खाली जमीन संशोधित 2011 लेआउट प्लान के अनुसार आरक्षित है और 1934 वर्ग गज का एक हिस्सा दिसंबर 2021 में संस्थागत भवन बनाने के लिए एक ट्रस्ट को एक्सचेंज किया गया है।
निवासियों ने सवाल उठाया कि “जेडीए गाइड मैप में ग्रीन पार्क और सड़क के रूप में दर्शाई गई भूमि पर जेडीए भवन बनाने की अनुमति कैसे दे सकता है? निवासियों ने इस 1934 वर्ग गज भूमि के आदान-प्रदान के बारे में सीएमओ कार्यालय को पहले ही लिखित आपत्तियां दी हैं।”
निवासियों का आरोप है कि वे दिसंबर 2021 से पहले ही नगर निगम जालंधर (एमसीजे) के साथ सड़क निर्माण के लिए अनुवर्ती कार्रवाई कर रहे थे। हरविंदर सिंह ने कहा कि गाइड मैप की स्थिति के बारे में दायर आरटीआई का जेडीए द्वारा ठीक से जवाब नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “यहां तक कि निवासियों के साथ PUDA कार्यालय में बैठकों के दौरान भी, आवास विभाग के अधिकारियों ने गाइड मैप के बारे में जांच के लिए निवासियों को जालंधर नगर निगम (MCJ) के पास भेज दिया। हैरानी की बात यह है कि MCJ ने भी कोई गाइड मैप लगाने से इनकार कर दिया।”
एक अन्य निवासी मनिंदर सिंह द्वारा दायर आरटीआई से पता चला कि जेडीए ने टेंडर नंबर के माध्यम से वर्ष 2010 में गाइड मैप लगाए थे। इससे निवासी वास्तव में हैरान हैं। उन्होंने पूछा कि आवास विभाग के अधिकारियों ने उन्हें एमसीजे के पास क्यों भेजा, जबकि जेडीए ने ही वर्ष 2010 में गाइड मैप लगाए थे।
गाइड मैप के स्वीकृत लेआउट प्लान के बारे में सीएमओ कार्यालय और आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव से पूछताछ की गई थी। चौदह महीने बाद जेडीए ने निवासियों के लगातार दबाव में जवाब दिया कि गाइड मैप केवल स्वीकृत लेआउट प्लान के माध्यम से ही लगाए जाते हैं और गाइड मैप के संबंधित लेआउट प्लान जेडीए फाइलों से गायब हैं। निवासियों ने आरोप लगाया कि पहले तो जेडीए अधिकारी उनकी आरटीआई का जवाब देने में देरी करते हैं, फिर उन्हें बेवजह एमसीजे के पास भेज दिया गया और फिर जेडीए के पास उनकी आरटीआई से पता चला कि गाइड मैप का संबंधित लेआउट प्लान जेडीए फाइलों से गायब है और अब अंततः जेडीए द्वारा उनकी कॉलोनी से गाइड मैप को हटाना निवासियों के मन में संदेह पैदा करता है। निवासियों ने आगे सवाल किया कि अधिकारियों के रिकॉर्ड से स्वीकृत लेआउट प्लान कैसे गायब हो सकता है।
निवासियों ने जेडीए को पत्र लिखकर कहा है कि वे हटाए गए गाइड मैप के लेआउट प्लान का कड़ाई से पालन चाहते हैं तथा गाइड मैप में दर्शाए अनुसार ग्रीन पार्क बेल्ट और सड़क चाहते हैं तथा उन्हें उम्मीद है कि जेडीए निवासियों के साथ न्याय करेगा।
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