7 फरवरी । जनकपुरी में सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत के मामले ने राजधानी की राजनीति गरमा दी है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने और परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग की है।
संजीव झा ने इस हादसे को सरकारी लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि सिर्फ अधिकारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवार को वास्तविक राहत देना सरकार की नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है। संजीव झा ने अपने पत्र में कहा कि जनकपुरी क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्य के दौरान सड़क में खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जिसने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बुनियादी सुरक्षा उपायों की अनदेखी आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है।
उन्होंने लिखा कि संबंधित विभागों द्वारा जांच और कार्रवाई की जानकारी जरूर सामने आई है, लेकिन इससे मृतक परिवार की पीड़ा कम नहीं हो सकती। आप विधायक ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मृतक परिवार ने अपना एकमात्र सहारा खो दिया है और अब उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे हालात में केवल जांच या निलंबन जैसी कार्रवाई पीड़ित परिवार के लिए कोई ठोस समाधान नहीं है।
संजीव झा ने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत आर्थिक मुआवजा देना चाहिए और परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करनी चाहिए, ताकि परिवार दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। उन्होंने पत्र में समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में यमुना नदी में डूबने से एक भाजपा कार्यकर्ता की मृत्यु के मामले में दिल्ली सरकार ने तत्काल मुआवजे की घोषणा की थी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी गई थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है तो जनकपुरी हादसे के पीड़ित परिवार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों नहीं किया जा रहा। संजीव झा ने अपने पत्र के अंत में मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की देरी किए बिना मृतक के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से न सिर्फ पीड़ित परिवार को जीवन दोबारा व्यवस्थित करने का अवसर मिलेगा, बल्कि सरकार की न्यायपूर्ण और संवेदनशील छवि भी जनता के सामने आएगी।

