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मध्य प्रदेश: खेती पर चर्चा अब दिल्ली में नहीं, बल्कि गांव में होगी: शिवराज सिंह चौहान

Madhya Pradesh: Discussions on farming will now take place in villages, not Delhi: Shivraj Singh Chouhan

7 फरवरी । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब खेती किसानी से संबंधित बैठक और चर्चा नई दिल्ली में कमरों में नहीं, बल्कि गांव में होगी। मध्य प्रदेश के सीहोर के अमलाहा में राष्ट्र स्तरीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत आयोजित राष्ट्र स्तरीय परामर्श से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर में इकॉर्डा (शुष्क क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र) परिसर में पौध-रोपण किया।

इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अक्सर कृषि मंत्रालय की बैठक दिल्ली में ही होती है, इसलिए हमने तय किया कि अब खेती पर चर्चा दिल्ली के कमरों में नहीं, सीधे गांव में होगी। खेत से दूर बैठकर खेती को समझा नहीं जा सकता, खेती तो खेत में ही समझी जाती है। इसी सोच के साथ पहली बार कृषि मंत्रालय को दिल्ली से बाहर निकालकर गांव में लाया गया है।

उन्होंने दलहन फसलों की पैदावार बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा संकल्प है कि मसूर, चना, उड़द, बटरा और मूंग जैसी दलहनों की उत्पादकता बढ़ाई जाए। इसके लिए हम ऐसे प्रयास कर रहे हैं कि बोने पर किसानों को अधिक उत्पादन मिले। इसी दिशा में उन्नत और बेहतर बीज लगातार विकसित किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ऐलान किया है कि हम एक फैसला कर रहे हैं। कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज नहीं होगा। अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज करेंगे। क्लस्टर मॉडल से खेती को मजबूती देंगे। किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढाया जाएगा। हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा, क्लस्टर में आने वाले किसान को बीज किट दी जाएगी। आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर 10,000 की सहायता दी जाएगी। बीज से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है। अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा। दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार 25 लाख रुपए तक की सब्सिडी देगी। जहां दाल का उत्पादन होगा, वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री होगी। इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएंगी। इनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएंगी।

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