इस जिले के मामदोत ब्लॉक में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित हजारासिंह वाला गांव में पीलिया के संदिग्ध प्रकोप में एक 13 वर्षीय लड़की की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य बच्चों में पीलिया की पुष्टि हुई है। चार बच्चों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दूषित पानी के कारण फैले इस प्रकोप ने स्वास्थ्य अधिकारियों को चिंतित कर दिया है। गांव में घर-घर जाकर व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया गया है।
कुल 58 रक्त नमूनों का परीक्षण किया गया और इनमें से 22 नमूनों में लेप्टोस्पाइरोसिस की पुष्टि हुई, जो एक जीवाणु संक्रमण है जो अक्सर पशुओं के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है।
उपायुक्त दीपशिखा शर्मा ने बताया कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं और 72 घंटों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पीलिया के सभी पुष्ट मामलों पर गहन निगरानी रखी जा रही है। एहतियात के तौर पर गांव में पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को ग्रामीणों की सहायता के लिए पानी के टैंकर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
चौथी कक्षा की छात्रा शैलजा को तेज बुखार और पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे थे, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। शैलजा की मां सीमा सिंह ने बताया, “हमने इसे सामान्य बीमारी समझा, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। अगर समय रहते साफ पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।” उन्होंने आगे बताया कि उनकी बड़ी बेटी मोनिका (15) और बेटा राहुल (10) पेट के संक्रमण से पीड़ित हैं।
सिविल मेडिकल ऑफिसर राजीव पाराशर ने कहा, “जिन बच्चों में पीलिया की पुष्टि हुई है, उन सभी की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “ममदोट स्वास्थ्य केंद्र में 30 बिस्तरों वाला एक विशेष वार्ड स्थापित किया गया है और 300 से अधिक निवासियों की जांच की जा चुकी है।”


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