N1Live National झारखंडः नौकरी खत्म करने के विरोध में सड़क पर उतरे सैकड़ों अभ्यर्थी, ‘न्याय दो या फांसी दो’ के नारे के साथ प्रदर्शन
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झारखंडः नौकरी खत्म करने के विरोध में सड़क पर उतरे सैकड़ों अभ्यर्थी, ‘न्याय दो या फांसी दो’ के नारे के साथ प्रदर्शन

Jharkhand: Hundreds of job aspirants take to the streets to protest the cancellation of jobs; demonstrate with slogans of "Give justice or give us the gallows."

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों और नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार शाम से ही सैकड़ों की संख्या में जुटे सफल अभ्यर्थी और प्रभावित कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन (झारखंड मंत्रालय) के मुख्य द्वार पर जमे हुए हैं और सरकार से फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर सुरक्षा घेरा पार किया और प्रोजेक्ट भवन परिसर के भीतर प्रवेश कर गए।

प्रदर्शनकारियों ने ‘इंसाफ दो या फांसी दो’ के नारे लगाए। तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और कर्मचारी रातभर प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहे। उनका कहना है कि सरकार के फैसले से उनकी नौकरी और भविष्य दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी नियुक्ति में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन कथित अनियमितता के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर निर्दोष अभ्यर्थियों को दंडित करना उचित नहीं है।

प्रदर्शन कर रहे जेएसएससी-सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की थी। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उन्होंने दूसरी जगहों की नौकरी छोड़कर झारखंड में सरकारी सेवा को चुना था। अब सरकार के फैसले के बाद वे फिर बेरोजगारी की स्थिति में पहुंच गए हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “कल तक हम सचिवालय में कर्मचारी थे, आज सड़क पर खड़े हैं। हमारी क्या गलती है? अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन हमारी नौकरी क्यों छीनी जा रही है?” प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को उनके मामले में अलग-अलग स्तर पर जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि जिस भर्ती में किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति नियमों के अनुसार हुई है, उसे केवल परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण समाप्त करना अन्यायपूर्ण है। कुछ प्रभावित सहायकों ने कहा कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी की, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की, और इसके बाद उन्हें नियुक्ति मिली।

कई लोगों ने नौकरी मिलने के बाद झारखंड में काम करने के लिए दूसरी नौकरियां तक छोड़ दी थीं। अब नौकरी समाप्त होने से उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।

बता दें कि छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने सीआईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द की हैं, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की है, और 17 परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। इसके अलावा, वर्ष 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच और समीक्षा का भी निर्णय लिया गया है।

सरकार के इस फैसले से जहां परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे बड़ी जीत बताया है, वहीं चयनित अभ्यर्थियों और प्रभावित कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से चयनित अभ्यर्थियों को उसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन के कारण सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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