कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति ने रविवार को केंद्र सरकार से पठानकोट और जोगिंदरनगर के बीच रेल सेवाएं तत्काल बहाल करने का आग्रह किया। समिति ने पठानकोट रेलवे स्टेशन को मामून छावनी के पास डलहौजी रोड पर स्थानांतरित करने के किसी भी कदम का विरोध किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में समिति ने स्थानीय निवासियों और हितधारकों की चिंताओं को उजागर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि रेलवे स्टेशन को स्थानांतरित करने का कोई भी निर्णय व्यापक जन परामर्श और निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाना चाहिए।
इस पत्र की प्रतियां रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल राज्य मंत्री और हिमाचल प्रदेश के सांसदों को ईमेल और अन्य संचार माध्यमों से भी भेजी गई हैं।
समिति ने आशंका व्यक्त की कि रेलवे स्टेशन को स्थानांतरित करने से यात्रियों की कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित होगी और स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों को असुविधा होगी। समिति ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और समग्र आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पठानकोट रेलवे स्टेशन वर्तमान में एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो हिमाचल प्रदेश को देश भर के प्रमुख शहरों से जोड़ता है।
समिति के अनुसार, स्टेशन को स्थानांतरित करने से यात्रियों के लिए यात्रा की दूरी और खर्च बढ़ जाएगा, साथ ही कांगड़ा घाटी में मौजूदा रेल नेटवर्क भी कमजोर हो जाएगा।
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा स्टेशन, जो 100 साल से अधिक पुराना है, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है और सैन्य छावनी, बस स्टैंड, अस्पताल, होटल और बाजार जैसी प्रमुख सुविधाओं तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित होने से विशेष रूप से छात्रों, मरीजों और रक्षा कर्मियों को काफी असुविधा होगी।


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